भारतीयों के टैक्स हेवन्स डिपॉजिट में बड़ी गिरावट : रिपोर्ट

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नई दिल्ली। भारतीय नागरिकों द्वारा टैक्स हेवन देशों में जमा की जाने वाली रकम में अच्छी खासी कमी आई है। अत्यधिक गोपनीयता बरतने और कम टैक्स रेट वाले देशों में भारतीयों के डिपॉजिट और नॉन बैंक लोन में 2013 से 2017 के बीच काफी गिरावट आई है। इस बात का जिक्र दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों की ग्लोबल बॉडी बैंक फॉर इंटरनैशनल सेटलमेंट्स (BIS) के डेटा पर आधारित सरकारी रिपोर्ट में है।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘सरकार विदेश में छिपा कर रखी गई ब्लैक मनी को देश में लाने को लेकर प्रतिबद्ध है। हमने इसके लिए कई कदम उठाए हैं जिसमें नोटबंदी भी शामिल है। उनके चलते नए ब्लैक मनी जेनरेशन पर रोक लगी है।’ सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, लग्जमबर्ग में भारतीयों के नॉन बैंक लोन और डिपॉजिट में 62 फीसदी की कमी आई है। वहां उनकी तरफ से जमा की गई रकम 2013 के 2.9 करोड़ डॉलर से घटकर 1.1 करोड़ डॉलर रह गई है।

इस अधिकारी ने कहा, ‘यह ट्रेंड ऐसे दूसरे देशों में भी है। हमें उम्मीद है कि सरकार के उठाए कदमों से हम सिस्टम का गलत इस्तेमाल करने वालों का पता लगाने और उन्हें कानून के कठघरे में खड़ा करने में कामयाब होंगे।’ इसी तरह जर्सी में जमा भारतीयों का पैसा 2013 के 26.1 करोड़ डॉलर से 17.6 फीसदी घटकर 2017 में 21.5 करोड़ डॉलर रह गया। अधिकारी ने बताया, ‘आइल ऑफ मैन में भारतीयों का डिपॉजिट इन चार वर्षों में 39.4 फीसदी गिरावट के साथ 11.9 करोड़ डॉलर से 7.2 करोड़ डॉलर रह गया है।’

BIS के डेटा में टैक्स हेवन्स के अलावा ब्रिटेन और फ्रांस में भारतीयों के डिपॉजिट्स भी शामिल हैं। जहां तक ब्रिटेन की बात है तो वहां 2013 से 2017 के बीच भारतीय नागरिकों का डिपॉजिट 2.73 अरब डॉलर से 32.2 फीसदी घटकर 1.85 अरब डॉलर रह गया।

फ्रांस में जमा इंडियंस का पैसा इस दौरान 66.3 फीसदी की तेज गिरावट के साथ 41.9 करोड़ डॉलर के मुकाबले 14.1 करोड़ डॉलर रह गया। पिछले महीने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राज्यसभा को बताया था कि स्विस बैंक में जमा भारतीयों का पैसा 2017 में 34.7 फीसदी कम हुआ था। उन्होंने कहा था कि 2014 में आई मोदी सरकार के बाद से वहां इंडियंस का डिपॉजिट 80 फीसदी घटा है।

गौरतलब है कि गोयल ने संसद को यह बात तब बताई, जब मीडिया में यह खबर आई कि स्विस बैंकों की भारत के प्रति देनदारी में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उसमें स्विस बैंकों के इंडियन ब्रांच का कारोबार और उनकी नॉन डिपॉजिट लाइबिलिटी शामिल थी। गोयल ने कहा था कि स्विस अथॉरिटीज के मुताबिक BIS का लोकेशनल बैंकिंग स्टैस्टिटिक्स स्विट्जरलैंड में डिपॉजिट रकम का ज्यादा भरोसेमंद डेटा है।