आरटीयू के ग्रेडिंग पैरामीटर बदलने से कई इंजीनियरिंग कॉलेज ए ग्रेड से बाहर

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कोटा। आरटीयू द्वारा इंजीनियरिंग कॉलेजों को ग्रेड देने के की प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरटीयू ने ग्रेडिंग के लिए काउंसलिंग के समय जो मापदंड तय किए थे, अचानक उनको 15 दिन बाद बदल दिया। इससे कई इंजीनियरिंग कॉलेज ए- ग्रेड की दौड़ से बाहर हो गए। ऐसे कॉलेजों ने आरटीयू के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वहीं विश्वविद्यालय का कहना है कि पैरामीटर में बदलाव एआईसीटीई के अनुसार ही किया है।

आरटीयू ने कॉलेजों की क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू तय करने के लिए 16 अप्रैल से 15 मई तक काउंसलिंग की थी। ग्रेडिंग के लिए 1 जनवरी 2017 से 30 अप्रैल 2018 तक की अवधि तय की गई। इस अवधि में 18 पैरामीटरों की जांच कर ग्रेड दी जानी थी।

इसमें जयपुर के आनंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को 1000 अंकों में से 617 अंक प्राप्त हुए। इस आधार पर कॉलेज को ए ग्रेड मिलनी थी। बाद में पैरामीटर बदलने से कॉलेज ए ग्रेड की सूची से बाहर हो गया।
आरटीयू ने जिस अवधि के पैरामीटर तय किए, उसको ताक पर रखकर जारी की ग्रेड

एक जून को लागू कर दिया नया पैरामीटर
15 मई को काउंसलिंग खत्म होने के बाद अचानक 1 जून को आरटीयू ने एक आदेश जारी कर सत्र 2018-19 के लिए कॉलेजों से फैकल्टी की डिटेल मांगी। इसमें फैकल्टी उसी को माना गया, जिसको एमटेक की डिग्री मिल चुकी है। आरटीयू के अधिकारियों ने चालाकी बरतते हुए इस डिटेल को क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू से जोड़ दिया, इसकी सूचना पहले कॉलेजों को नहीं दी गई।

इससे आनंद कॉलेज सहित कुछ कॉलेजों के नंबर कम कर दिए और वो बी ग्रेड में आ गए। कॉलेज संचालकों का कहना है कि जब जनवरी 2017 से अप्रैल 2018 तक की अवधि तय थी, तो इसमें अचानक बदलाव करना गलत है। पिछले साल भी आरटीयू ने ग्रेडिंग की थी, तब ऐसी कोई पाबंदी नहीं थी कि फैकल्टी एमटेक डिग्री प्राप्त ही होनी चाहिए।

पैरामीटर बदलने से आरटीयू की कार्यप्रणाली पर इसलिए सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब एआईसीटीई भी फैकल्टी के लिए बीटेक को मान्य करने की छूट दे रहा है तो आरटीयू ग्रेडिंग में एमटेक की अनिवार्यता क्यों लागू कर रहा है।

बदलाव किया
ग्रेडिंग के केवल एक पैरामीटर में हमने बदलाव किया था। यह भी एआईसीटीई के नियमों के अनुसार ही था। इसमें हमने फैकल्टी एमटेक होना मांगा था। इस मामले पर हमारे पास अब तक एक भी इंजीनियरिंग कॉलेज ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई है। – प्रो. विवेक पांडे, डीन, एकेडमिक अफेयर, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय