5 सालों में सरकारी बैंकों में फाइनैंशल फ्रॉड में 20 फीसदी की बढ़ोतरी

    0
    27

    नई दिल्ली।  पिछले 5 सालों के दौरान सरकारी बैंकों में फाइनैंशल फ्रॉड में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यही कारण है कि बैंकों का एनपीए यानी बैड लोन बढ़कर 9 लाख करोड़ पहुंच गया है। बैंकों ने माना है कि टेक्निकल सिस्टम अपग्रेड नहीं होने के कारण फाइनैंशल फ्रॉड बढ़ा है। बैंकों ने यह बात संसद की वित्तीय मामलों की स्थायी समिति के सामने कबूली है। इस समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता एम. वीरप्पा मोइली हैं।

    गौरतलब है कि संसद की वित्तीय मामलों की स्थायी समिति ने जून के आखिरी हफ्ते में 11 सरकारी बैंकों के साथ एनपीए को लेकर मीटिंग की थी। इस मीटिंग में समिति ने बैंकों से पूछा था कि फाइनैंशल फ्रॉड कितना बढ़ा और बैंक इसे रोकने में नाकाम क्यों रहे। गौरतलब है कि माल्या और नीरव मोदी प्रकरण के बाद सरकारी बैंकों के वर्किंग सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं। पीएनबी फ्रॉड की जांच में यह सामने आया कि बैंक के टेक्निकल सिस्टम को अपग्रेड करने की कोशिश नहीं की गई थी।

    स्टाफ की कमी
    सूत्रों के अनुसार बैंकों ने समिति को बताया कि उनके पास जो डेटा है, उसके अनुसार पिछले 5 सालों में फाइनैंशल फ्रॉड में 18 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। बैंकों ने यह भी माना कि एनपीए बढ़ने की प्रमुख वजह वसूली स्टाफ की कमी भी है। बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों पर बोझ ज्यादा है।

    हालांकि बैंकों ने बताया कि अब सिस्टम अपग्रेड हो रहा है और एनपीए वसूली की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। जिन बैंकों ने मीटिंग में हिस्सा लिया, उनमें इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, देना बैंक, आईडीबीआई बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, यूको बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यूनाइटेड बैंक शामिल थे।

    संसदीय समिति ने मांगी अपग्रेड रिपोर्ट
    वित्तीय मामलों की समिति ने इन बैंकों को आदेश दिया है कि वे समिति को सौंपने वाली रिपोर्ट में वर्किंग सिस्टम सुधारने के लिए अलावा ब्योरा दें कि फाइनैंशल फ्रॉड रोकने के लिए क्या कदम उठाए और कितनी सफलता मिली।

    रिपोर्ट में फाइनैंशल फ्रॉड के आंकड़े भी इन बैंकों को देने होंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फ्रॉड करनेवालों के खिलाफ सरकार ने क्या कदम उठाए और आरोपी अब कहां हैं। कहीं वे विदेश तो नहीं चले गए।