AIIMS : MBBS टॉपर बनीं एलिजा, ‘कोचिंग कैपिटल’ कोटा का दबदबा बरकरार

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नई दिल्ली/कोटा। एम्स के एमबीबीएस एग्जाम में पंजाब की एलिजा बंसल टॉप किया है। उन्होंने 100 पर्सेंटाइल अंक हासिल कर पहले नंबर पर रहीं। भटिंडा की रमणीक कौर महल दूसरे नंबर पर रहीं। महक अरोड़ा तीसरे और मनराज ने चौथा स्थान हासिल किया। टॉप थ्री में सभी लड़कियां हैं। टॉप चार में तीन पंजाब से हैं।

एलिजा बंसल पंजाब की संगरूर जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने कहा कि वह कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती हैं। एलिजा ने कहा, ‘मुझे टॉपर बनने की कोई उम्मीद नहीं थी। सेकंड टॉपर रमणीक कौर भटिंडा की रहने वाली हैं। चौथी पोजिशन पर रहे मनराज भी भटिंडा के ही रहने वाले हैं। थर्ड टॉपर महक अरोड़ा पंचकुला (हरियाणा) की रहने वाली हैं।

देशभर के 9 एम्स के लिए 26 और 27 मई को 32 राज्यों के करीब 155 सेंटर्स पर ऑनलाइन एग्जाम हुआ था। 807 सीटों के लिए दो लाख से ज्यादा बच्चों ने परीक्षा दी थी। इसमें जनरल कैटिगरी के लिए 450 सीटें, ओबीसी के लिए 243, एससी के लिए 135, एसटी के लिए 72 और सभी कैटिगरी में 3 प्रतिशत सीटों पर दिव्यांग को ऐडमिशन दिया जाता है।

एम्स, नई दिल्ली में 7 सीटें फॉरेन स्टूडेंट के लिए होंगी। उम्मीदवारों को दिल्ली, पटना, भोपाल, जोधपुर, भुवनेश्वर, ऋषिकेश, रायपुर, गुंटूर और नागपुर कैंपस में ऐडमिशन दिया जाता है। एम्स की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, जनरल कैटिगरी के लिए 98.8334496 पर्सेंटाइल, ओबीसी उम्मीदवारों के लिए 97.0117712 पर्सेंटाइल और एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 93.6505421 पर्सेंटाइल कटऑफ थीं।

तीन चरणों में काउंसलिंग की जाएगी। एमबीबीएस कोर्सेज में ऐडमिशन के लिए 3 जुलाई से काउंसलिंग शुरू होगी। काउंसलिंग का पहला चरण 3 से 6 जुलाई, दूसरा 2 अगस्त से और तीसरा चरण 4 सितंबर को होगा। इसके बाद ओपन काउंसलिंग 27 सितंबर से होगी।

‘कोचिंग कैपिटल’ कोटा का दबदबा बरकरार
इस साल भी एम्स एंट्रेंस एग्जाम में ‘कोचिंग कैपिटल’ कोटा का दबदबा कायम रहा है। इस साल 10 टॉपर में से 9 कोटा से हैं हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस साल कोटा का 100 परसेंट कब्जा बरकरार नहीं रह पाया है। ध्यान रहे की साल 2017 में एम्स एंट्रेंस के 10 में से 10 टॉपर्स कोटा से थे।

‘टॉपर्स और कम रैंक पाने वालों के बीच सिर्फ हार्ड वर्क का फर्क’
एम्स की इस साल की प्रवेश परीक्षा में सेकंड टॉपर रहीं पंजाब के भटिंडा की रमणीक कौर ने कहा है कि उन्हें टॉप-5 में आने की उम्मीद नहीं थी। एनबीटी से बातचीत में रमणीक ने कहा कि उन्होंने अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी। रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करने वालीं रमणीक ने कहा कि सबकी अपनी तैयारी होती है, लेकिन तैयारी को सही दिशा में ले जाने में कोचिंग से मदद मिलती है।

उन्हें टेस्ट बुक्स और नोट्स का काफी फायदा हुआ। रमणीक ने कहा, एम्स की तैयारी मैंने 2 साल पहले शुरू कर दी थी। रमणीक न्यूरोलॉजिस्ट बनने का सपना देख रही हैं। नोबेल पढ़ना, गिटार बजाना और पेंटिग्स उनकी हॉबी है। लेकिन, नई हॉबी में लोगों का इलाज भी शामिल हो गया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि टॉपर्स और कम रैंक वालों में कोई ज्यादा अंतर नहीं होता है, बस केवल हार्ड वर्क है जो किसी को उसकी मंजिल तक पहुंचाता है।

जहां मुश्किल आई, टीचर्स ने मदद की
पंचकूला की महक अरोड़ा ने एम्स एमबीबीएस परीक्षा में तीसरा स्थान हासिल किया है। उन्होंने कहा, जो कर पाई हूं, मम्मी-पापा की वजह से। तैयारी के बारे में बताते हुए महक ने कहा कि रोजाना 6 से 7 घंटे पढ़ाई करती थी। उन्होंने टीचर का सपोर्ट काफी जरूरी बताया। कहा कि किसी जगह फंसने पर टीचर्स रास्ता निकालने में काफी मदद करते हैं। वह पढ़ाई के साथ-साथ आत्मविश्वास भी भरते हैं।

उन्होंने कहा कि जब मैं 7वीं में थी, तभी पापा की डेथ हो गई। मां ने कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी। जहां तक टॉपर्स में शामिल होने की बात है। महक ने कहा, इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता है। महक कहती हैं, हर दिन किसी के लिए खास होता है। आज मेरे लिए था।

अर्जेंटीना और मेसी के दीवाने मनराज
एम्स एमबीबीएस परीक्षा में चौथे स्थान पर रहे भटिंडा के मनराज सरा पढ़ाई में तो आगे हैं ही, फुटबॉल के शौकीन भी हैं। वह अर्जेंटीना की फुटबाल टीम को सपोर्ट कर रहे हैं और मेसी के दीवाने हैं। उन्होंने कहा रोजाना 8 से 10 घंटे की पढ़ाई काफी है। शुरू में मुश्किल होता है, लेकिन जैसे-जैसे तैयारी पूरी होती है, परेशानी कम होने लगती है।

उन्होंने भी टीचर्स की गाइडेंस को जरूरी बताया। कहा, टीचर्स का साथ नहीं हो तो पढ़ाई में अच्छे होने के बाद भी एग्जाम क्लीयर नहीं हो पाता है। मनराज ने कहा कि पिछले साल का पेपर सॉल्व करने से उनका कॉन्फिडेंस काफी बढ़ गया था। उम्मीद थी कि एग्जाम क्लीयर कर लूंगा।

लेकिन यह उम्मीद नहीं थी कि टॉप 10 में नाम आएगा। मनराज के माता-पिता भी डॉक्टर हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर बनने का कोई प्रेशर नहीं था। लेकिन मरीजों की सेवा करने की प्रेरणा उन्हें घर से ही मिली। मनराज भी न्यूरोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं।