पेपर एनालिसिस-एम्स-2018 : कठिन रही फिजिक्स, केमेस्ट्री व बॉयलोजी सामान्य

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बृजेश माहेश्वरी, कोटा।  देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल शिक्षण संस्थान ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) एमबीबीएस एंट्रेंस के लिए ऑनलाइन परीक्षा शनिवार को शुरू हो गई। परीक्षा शनिवार को सुबह 9 से 12.30 बजे तक हुई तथा शाम को 2 से 5 की पारी में हुई। रविवार को भी दो पारियों में परीक्षा होगी।

पहले दिन हुई परीक्षा के बाद विद्यार्थियों से बातचीत के आधार पर यह कहा जा सकता है कि पेपर सामान्य रहा। फिजिक्स के सवाल उलझाने वाले रहे, थोड़ी कठिनाई विद्यार्थियों को इस पेपर में हुई। इसके अलावा बॉयलोजी और केमेस्ट्री सामान्य रहे। परीक्षा में कुल 200 प्रश्न पूछे गए। इसमें फिजिक्स, केमेस्ट्री व बॉयलोजी, हर विषय में 60-60 सवाल पूछे गए। इनमें 40 सवाल वैकल्पिक तथा 20 सवाल अर्सशन रिजनिंग (ए-आर) के रहे। सामान्य ज्ञान व एप्टीट्यूट के 20 प्रश्न पूछे गए।

प्रत्येक सवाल एक अंक का था। गलत जवाब देने पर एक तिहाई अंक का ऋणात्मक मूल्यांकन था। सामान्य ज्ञान में करंट अफेयर, लॉजिकल रिजनिंग, पहेलियां व तकनीक से जुड़े सवाल थे। इतिहास से जुड़े सवाल नहीं थे। इन सवालों में लोकसभा स्पीकर का नाम, मोबाइल सिग्नल पहचानो, आईएमईआई नम्बर क्या होता है, जैसे सवाल प्रमुख थे। विद्यार्थियों के समक्ष कम्प्यूटर पर पूरा पेपर एक साथ ओपन हुआ, जिसमें वे अपनी प्राथमिकता के अनुसार हल करने के लिए प्रश्नों का चयन कर सकते थे।

फिजिक्स
फिजिक्स का पेपर गत वर्ष की तरह विद्यार्थियों के लिए थोड़ा कठिन रहा। इस पेपर में कुछ सवालों में विद्यार्थियों ने जहां स्क्रीन केलकूलेटर का इस्तेमाल किया। वहीं कुछ सवालों में लॉजिक्स भी लगाने पड़े। कुछ क्रिएटिव प्रश्न भी रहे, जिनसे विद्यार्थियों को जूझना पड़ा। इस पेपर में ऑब्जेक्टिव प्रश्न लॉजिकल अधिक होने के कारण विद्यार्थियों समय अधिक लगा। कॉन्सेप्चूअल अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को ज्यादा समस्या नहीं आई, उनके लिए ए-आर के प्रश्न आसान रहे।

बॉयलोजी
बॉयलोजी का पेपर ओवरआल बहुत आसान कहा जा सकता है। पूरा पेपर एनसीईआरटी बेस्ड रहा। कुछ सवाल डायग्राम बनाकर पूछे गए। बॉटनी व जूलॉजी के सवाल समान रूप से पूछे गए। कुछ ही सवालों में विद्यार्थी असमंजस में रहे।

केमेस्ट्री
केमेस्ट्री में सवाल सामान्य रहे। कुछ सवालों की भाषा ऐसी उलझाने वाली थी कि विद्यार्थी असमंजस में रहे, समझने के लिए लॉजिक लगाना पड़ा। पूरा पेपर एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुसार ही था। ए-आर के सवाल क्रिएटिव रहे, इनमें कुछ सवालों में विद्यार्थी उलझे।

जेईई-एडवांस की तर्ज पर दिए जाएं प्रश्नपत्र व रेस्पोंस
परीक्षा देकर आने वाले विद्यार्थियों ने एम्स की परीक्षा भी जेईई-एडवांस की तर्ज करवाने की मांग की। विद्यार्थियों ने कहा कि इस वर्ष जेईई-एडवांस की परीक्षा भी ऑनलाइन हुई, उसमें भी लाखों विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, लेकिन परीक्षा के कुछ ही दिनों में प्रश्नपत्र जारी कर दिए गए। अब आंसर-की भी जारी कर दी जाएगी।

यही नहीं विद्यार्थियों को रेस्पोंस शीट भी जारी कर दी गई। इससे सिस्टम में पूरी तरह से पारदर्शिता नजर आती है। विद्यार्थी स्वयं का आकलन कर सकता है। पेपर का एनालिसिस ज्यादा बेहतर तरीके से हो सकता है। जब आईआईटी में इतनी पारदर्शिता रखते हुए परीक्षा करवाई जा सकती है तो एम्स में भी इसी तरह से परीक्षा ली जानी चाहिए ताकि सिस्टम पूरी तरह से विश्वसनीय और पारदर्शी हो सके।

इतने केन्द्रों पर परीक्षा
परीक्षा राजस्थान सहित देश के 29 राज्यों के 155 शहरों में आयोजित की जा रही है। राजस्थान में नौ शहरों जयपुर, कोटा, जोधपुर, अजमेर, अलवर, उदयपुर, बीकानेर, सीकर, श्रीगंगानगर में परीक्षा केंद्र रहे। देशभर में करीब 3 लाख स्टूडेंट परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा 27 मई को भी आयोजित की जाएगी।

इस परीक्षा के जरिये एम्स के न्यू दिल्ली, भोपाल, जोधपुर, ऋषिकेश, भुवनेश्वर, पटना, गुंटूर, नागपुर एवं रायपुर के एम्स मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिलेगा। इस वर्ष नागपुर तथा गुंटुर में दो एम्स खुलने से 100 सीटे बढ़ी हैं। देश के 9 एम्स संस्थानों में एमबीबीएस की 807 सीटों के लिए यह परीक्षा होगी।

गत वर्ष एम्स-यूजी में 2.84 लाख परीक्षार्थियों में से केवल 4,905 विद्यार्थी ( 1.72 फीसदी) क्वालिफाई हुए थे। इससे पहले 2016 में 1.89 लाख में से 7137 (3.77 फीसदी) क्वालिफाई हुए थे।

नोट: लेखक बृजेश माहेश्वरी एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के निदेशक हैं