आईआरसीटीसी से 35 रुपये के रिफंड के लिए कोर्ट में दस्तक

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कोटा।  यदि आप के किसी लेन-देन में कुछ पैसों का हेरफेर हो जाए तो आप कितने दिन तक कंपनी का पीछा करेंगे? शायद एक या दो सप्ताह। लेकिन, कोटा के इंजीनियर सुजीत स्वामी आईआरसीटीसी से 35 रुपये कम रिफंड मिलने पर बीते एक साल से केस लड़ रहे हैं।

इंजीनियर सुजीत स्वामी ने कोटा से दिल्ली तक के लिए 765 रुपये का टिकट बुक कराया था, जिसे उन्होंने कैंसल दिया था। इस पर उन्हें 665 रुपये मिले थे, जबकि उन्हें 700 रुपये वापस मिलने चाहिए थे। इसके बाद सुजीत स्वामी ने लोक अदालत में मामला दायर किया, जिसने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन, वेस्ट-सेंट्रल रेलवे जनरल मैनेजर, आईआरसीटीसी के जनरल मैनेजर और कोटा के डिवीजनल रेलवे मैनेजर को नोटिस जारी किया।

स्वामी ने अप्रैल, 2017 में गोल्डन टेंपल मेल का टिकट बुक किया था। उनका टिकट वेटिंग का था, इसलिए उन्होंने इसे कैंसल करा दिया। टिकट कैंसल कराने पर उनसे सर्विस टैक्स भी चार्ज किया गया, जबकि उन्होंने टिकट जीएसटी लागू होने से पहले ही कैंसल करा दिया था। यह टिकट 2 जुलाई की यात्रा के लिए बुक कराया गया था, जबकि 1 जुलाई को ही देश भर में जीएसटी लागू किया गया था।

जीएसटी लागू होने के बाद भी IRCTC ने काटा सर्विस टैक्स
याचिकाकर्ता के वकील रोहित सिंह राजावत ने कहा, ‘एसीजेएम की ओर से याचिका को स्वीकार करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया है। इस मसले पर अगली सुनवाई 28 मई को होनी है।’

स्वामी ने कहा, ‘वेटलिस्टेड टिकट को कैंसल कराने पर 100 रुपये चार्ज किए गए, जबकि यह सिर्फ 65 रुपये ही होता है। इसके बाद मैंने बीते साल जुलाई में ही आईआरसीटीसी में आरटीआई फाइल की और शिकायत भी दर्ज कराई। तब मुझे कहा गया कि आपकी राशि रिफंड की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’

IRCTC के इस फैसले से पैदा हुई गफलत
हालांकि आईआरसीटीसी की ओर से आरटीआई के जवाब में कहा गया कि रेल मंत्रालय के सर्कुल के मुताबिक यदि किसी ने जीएसटी लागू होने से पहले टिकट बुक कराया और फिर जीएसटी लागू होने के बाद कैंसल कराया तो बुकिंग के दौरान लिया गया सर्विस चार्ज वापस नहीं होगा।

इसीलिए टिकट को कैंसल कराने पर 65 रुपये चार्ज वसूला गया और सर्विस टैक्स के तौर पर वसूले गए 35 रुपये भी रिफंड नहीं किए गए। हालांकि आरटीआई में आगे यह भी कहा गया है कि रेलवे ने बाद में फैसला लिया था कि जीएसटी से पहले बुक टिकटों को कैंसल कराने पर भी सर्विस चार्ज वापस किया जाएगा। इसलिए 35 रुपये वापस किए जाएंगे। आईआरसीटीसी की खामी का शिकार होने वाले स्वामी अकेले शख्स नहीं हैं, इस तरह तकरीबन 9 लाख यात्री रेलवे के इस फैसले से परेशान हैं।