बिना डॉक्टरी सलाह नहीं मिलेगी गोरा बनाने वाली क्रीम

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नई दिल्ली। अब गोरा बनाने का दावा करने वाली क्रीम बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेगी। सरकार ने एंटीबॉयोटिक और स्टेरॉयड मिक्स वाली ऐसी 14 तरह की क्रीम को ओवर द काउंटर की लिस्ट से हटा दिया है। इसकी जगह इन्हें शिड्यूल-H में शामिल किया है। यानी अब ऐसी क्रीम खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची जरूरी होगी। इसके तहत अब ऐसी क्रीम लेने के लिए डॉक्टर की सहमति लेना जरूरी है।

ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड ने किया रिकमंड
हेल्थ मिनिस्ट्री इस बारे में नोटिफिकेशन भी जारी कर चुकी है, जिसमें यह जानकारी दी गई है कि एस्टेरॉयड मिक्स क्रीम को बगैर डॉक्टर के सलाह बेचने वालों पर फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) एक्शन ले सकता है। ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से सलाह करने के बाद यह निर्णय लिया गया है।

ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड ने यह रिकमंड किया कि बिना डॉक्टर की पर्ची के ऐसी क्रीम की बिक्री पर रोक लगाई जाए। यह रिकमंडेशन सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन को भी भेजा गया था।

बिना गाइडेंस बिक रहे थे प्रोडक्ट
नए नियम के अनुसार, डेसोनाइड,बेक्लोमेथासोन सहित इस तरह की 14 चीजों का जिन क्रीम में इस्तेमाल होगा, उसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है। असल में इसके पहले डर्मेटोलॉजिस्ट की ओर से यह लगातार शिकायतें आ रही थीं कि कुछ कंपनियां बिना मेडिकल गाइडेंस पूरा किए एस्टेरॉएड बेस्ड क्रीम मार्केट में बेच रही हैं। इसके गलत इस्तेमाल से यूजर को गंभीर परेशानी भी हो सकती है। रिवाइज्ड रूल के अनुसार ऐसी क्रीम ऑर्डिनैरी फेस क्लीनिंग के लिए इस्तेमाल नहीं की जा सकती हैं।

बिना सलाह नहीं हो सकते इस्तेमाल
स्टेरॉयड व एफडीसी वाले फेयरनेस क्रीम दवा की कटेगिरी में आते हैं, जिसके बावजूद ये मार्केट में बिना प्रिस्क्रिप्सन खुलेआम बिक रहे हैं। इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनरियोलॉजिस्ट एंड लैप्रोलॉजिस्ट ने काफी पहले डीजीसीआई व सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन से मांग की थी कि बिना प्रिस्क्रिप्सन ऐसे प्रोडक्ट की सेल बैन हो। ये प्रोडक्ट दवा की तरह हैं और बिना एक्सपर्ट की सलाह के इस्तेमाल नहीं हो सकते। इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनरियोलॉजिस्ट एंड लैप्रोलॉजिस्ट के अनुसार स्टेरॉयड वाली फेयरनेस क्रीम एक तरह से दवा है।

परेशानी ठीक करने का दावा करती हैं कंपनियां
इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनरियोलॉजिस्ट एंड लैप्रोलॉजिस्ट के अनुसार ऐसे प्रोडक्ट बनाने वाली तमाम कंपनियां विज्ञापनों के जरिए किसी बीमारी को ठीक करने या दाग-धब्बे मिटाने का दवा करती हैं। जबकि, ये प्रोडक्ट ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के तहत स्पेसिफाइड हैं। कोई भी मैन्युफैक्चरर इन प्रोडक्ट के जएि बीमारी ठीक करने का दावा नहीं कर सकता है। लेकिन, बहुत से लोग उनके दावों को सही मान बैठते हैं। इस तरह के विज्ञापनों पर भी रोक लगाई जानी जरूरी है।