“वक्रांगी” सेबी की जांच के दायरे में, बाजार पूंजीकरण भी घटा

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मुंबई। वक्रांगी कंपनी संचालन से जुड़े मुद्दों की वजह से भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की जांच के दायरे में आ गई है। पिछले कुछ दिनों से बड़ी गिरावट के शिकार हुए वक्रांगी के शेयर में शुक्रवार को इस बार ऊपर का सर्किट लग गया। शुक्रवार को यह शेयर बीएसई में 182.80 पर खुला था और 5 प्रतिशत के सर्किट के साथ 202 पर बंद हुआ।

पिछले कई दिनों से गिरावट की वजह से इस शेयर में खरीदारों की दिलचस्पी लगभग समाप्त हो गई थी। गिरावट की वजह से कंपनी का बाजार पूंजीकरण भी 265 अरब रुपये कम होकर 251 अरब रुपये रह गया था। 2017 की पहली छमाही में कीमतों और कारोबार में छेड़छाड़ के लिए कंपनी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की जांच के दायरे में आ गई है।

हालांकि सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की इस कंपनी ने कहा कि उस पर लगे आरोप आधारहीन हैं। कंपनी ने कहा कि उसे बाजार नियामक या एक्सचेंजों की तरफ से कोई आधिकारिक संवाद प्राप्त नहीं हुआ है।

पीसी ज्वैलर भी सुधरने से पहले बड़ी गिरावट का शिकार हुई थी और वक्रांगी से जुड़े होने की वजह से इसमें कुछ ही दिनों में लगभग 26 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। वक्रांगी ने 25 जनवरी को पीसी ज्वैलर में अपने 15 अरब रुपये के टे्रजरी फंड से 1.12 अरब रुपये निवेश किए थे।

नियामक की नजर में आने के अलावा वक्रांगी की ट्रेजरी निवेश नीतियों में अचानक बदलाव से भी बाजार का माथा ठनक गया। हाल के बदलाव से पहले इसके ट्रेजरी फंड का 70 प्रतिशत हिस्सा फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में जमा था, जबकि शेष रकम म्युचुअल फंडों और प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश में थीे। कंपनी ने संकेत दिया था कि डायरेक्ट इक्विटी और प्राइवेट प्लेसमेंट फंड में कोई रकम निवेश नहीं की जाएगी।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी संचालन से जुड़े मुद्दों की वजह से वक्रांगी का बाजार मूल्यांकन प्रभावी होगा। वक्रांगी की अहमियत घटाने वाली बीऐंडके रिसर्च पहले कंपनी की वित्तीय और ग्रामीण क्षेत्रों में संभावनाओं को लेकर सकारात्मक थी। हालांकि अब कंपनी का कहना है कि वक्रांगी के कंपनी संचालन में सुधार का इसका आकलन मौजूदा परिवेश में सटीक नहीं बैठ रहा है, इसलिए उसने कंपनी की रेटिंग कम की है।

दूसरे बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वक्रांगी के कारोबार प्रारूप पर खतरा मंडरा सकता है। कंपनी का कारोबारी प्रारूप ग्रामीण ग्राहकों को ऑनलाइन सेवाओं के लिए एक्सेस पाइंट प्रदान काम करता है। विश्लेषकों की नजर में दूरसंचार और आईटी सुविधाएं तेजी से पहुंचने से कंपनी का एक्सेस पाइंट का महत्त्व कम हो सकता है।

दिसंबर तिमाही में वक्रांगी और पीसी ज्वैलर दोनों ने राजस्व में क्रमश: 80 प्रतिशत और 40 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की थी। साथ ही आलोच्य अवधि में इनके शुद्ध मुनाफे में भी करीब 80 प्रतिशत और 50 प्रतिशत तेजी आई थी। वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा है, लेकिन अनिश्चितता और कंपनी संचालन से जुड़ी चिंताओं की वजह से विशेषज्ञ इन शेयरों से परहेज करने की सलाह दे रहे हैं।