उड़ान के दूसरे चरण में भी कोटा को नहीं मिली नई फ्लाइट

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कोटा। भारत सरकार के केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम उड़ान योजना’ के दूसरे राउंड से कोटा को निराशा हाथ लगी है। सप्ताहभर पहले दूसरे चरण के रूट्स अवार्ड किए गए हैं, इसमें कोटा को लेकर किसी ऑपरेटर का चयन नहीं हो सका है। इसकी सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है कोटा एयरपोर्ट का मौजूदा रनवे, जहां बड़े विमान नहीं उतर सकते।

जब नए रूट्स अवार्ड होने के बाद पड़ताल की तो सामने आया कि राजस्थान के बीकानेर, जैसलमेर, किशनगढ़ और उतरलाई एयरपोर्ट को लेकर ऑपरेटर्स का चयन कर लिया गया है। कोटा का इस सूची में कहीं नाम नहीं है। कुछ कंपनियों ने कोटा को लेकर रुचि भी दिखाई थी। 

केंद्र सरकार ने नए रूट्स के लिए कोटा से भी मांगे थे टेंडर
भारत सरकार ने उड़ान के दूसरे चरण के जिन रूट्स के लिए टेंडर मांगे थे, उनमें कोटा भी शामिल था। कोटा से कई नए रूट्स जोड़ते हुए अहमदाबाद, मुंबई, दिल्ली, जयपुर, लखनऊ और इंदौर से सीधी एयर कनेक्टिविटी प्रस्तावित थी। वर्तमान में कोटा से सिर्फ जयपुर की कनेक्टिविटी है, वह भी शेड्यूल्ड एयर सर्विस नहीं है। एक चार्टर फ्लाइट के तौर पर इंट्रा स्टेट एयर कनेक्टिविटी के तहत सेवा संचालित है।

अधिकतम 1500 मी. तक बढ़ सकता है रनवे
कोटा एयरपोर्ट का मौजूदा रनवे 1220 मीटर ही है, ऐसे में इस पर छोटे विमान ही उड़ सकते हैं। कोटा में रुचि दिखा रही कंपनियों की मानें तो इस रनवे को बढ़ाकर 1500 मीटर तक भी कर दिया जाए तो भी यहां एटीआर-42 श्रेणी के विमान ही उतारे जा सकते हैं, वह भी लोड घटाकर।

इसमें सबसे बड़ा पेंच यह है कि इस तरह के विमान अब कॉमर्शियली वाईबल नहीं है और देश में गिनती के ही ऐसे विमान बचे हैं। सामान्य 50 सीटर विमान उतारने के लिए भी 1600 से 1700 मीटर लंबा रनवे चाहिए, जो कोटा में नहीं है। एएआई के सूत्रों ने बताया कि कोटा एयरपोर्ट के रनवे को लेकर पूर्व में सर्वे कराया जा चुका, इसे दादाबाड़ी वाले छोर पर 1500 मीटर तक बढ़ाने की गुंजाइश है, लेकिन इससे ज्यादा संभव नहीं है।

शंभूपुरा में चिह्नित है नए एयरपोर्ट की जमीन
सारे हालात से यह बात स्पष्ट है कि कोटा की बड़े शहरों से एयर कनेक्टिविटी तभी संभव है, जब यहां नया एयरपोर्ट शुरू हो जाए। इसके लिए कोटा के 2031 के मास्टर प्लान में शंभूपुरा में 750 एकड़ जमीन भी चिह्नित की गई है। यह जमीन आबादी क्षेत्र से दूर है और इस इलाके को मास्टर प्लान में नए ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित करना तय किया गया है।