NEET: अब सभी के लिए एक जैसे क्वेस्चन पेपर

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नई दिल्ली। अब मेडिकल कोर्सों जैसे एमबीबीएस और बीडीएस में दाखिल के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा नैशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) के पेपर एक जैसे होंगे। अब तक क्षेत्रीय भाषाओं में पेपर के अलग सेट होते थे लेकिन गुरुवार को सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब सभी के लिए इस साल से एक ही सेट होगा। उसे ही अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा।

छात्रों का आरोप था कि नीट 2017 के लिए क्षेत्रीय भाषाओं के क्वेस्चन पेपर्स इंग्लिश और हिंदी के मुकाबले ज्यादा मुश्किल थे। एग्जाम को रद्द करने के लिए छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की थीं।

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया था कि क्षेत्रीय भाषाओं में कुछ सवाल गलत थे जिससे प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण होने का उनका चांस कम हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सीबीएसई के इस कदम को अतार्कित बताया जिसके बाद सीबीएसई को यह फैसला लेना पड़ा।

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एस.अब्दुल नजीर की बेंच के सामने सीबीएसई के वकील तारा चंद्र शर्मा ने बताया कि सभी छात्रों के लिए एक ही क्वेस्चन पेपर होगा और क्षेत्रीय भाषाओं का चयन करने वाले छात्रों को इसका अनुवाद मुहैया कराया जाएगा। छात्रों को 10 भाषाओं में परीक्षा देने की अनुमति है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर अलग-अलग क्वेस्चन पेपर्स मुहैया कराए जाएंगे तो समानता नहीं होगी। कोर्ट ने सीबीएसई से एक ही क्वेस्चन पेपर को अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद कराने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने कहा था, ‘यह एक अतार्किक प्रक्रिया है। जब छात्रों के क्वेस्चन पेपर अलग होंगे तो आप उनकी क्षमताओं का मूल्यांकन कैसे करेंगे? अलग-अलग क्वेस्चन पेपर्स की कोई जरूरत नहीं है। हिंदी, इंग्लिश और अन्य भाषाओं में एक ही क्वेस्चन पेपर होने चाहिए।’