‘पद्मिनी’ विवाद से बढ़ा राजस्थान का टूरिज्म

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जयपुर। पद्मावत फिल्म पर हुआ विवाद राजस्थान के टूरिज्म के लिए फायदेमंद साबित होता नजर आ रहा है। राज्य का मेवाड़ इलाका जो रानी पद्मिनी के किस्से-कहानियों का घर है, वहां दिसंबर 2017 में पिछले साल से दोगुना टूरिस्ट पहुंचे हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म ‘पद्मावती’ का नाम बदलकर ‘पद्मावत’ करने और कुछ बदलाव करने पर आखिरकार सेंसर बोर्ड ने फिल्म को हरी झंडी दिखा दी। बता दें कि यह फिल्म 25 जनवरी को रिलीज की जा रही है।

चित्तौड़गढ़ में 40000 से बढ़कर 80000 हुए टूरिस्ट
 चित्तौड़गढ़ के असिस्टेंट टूरिज्म ऑफिसर शरद व्यास ने बताया कि पद्मिनी के गृह नगर चित्तौड़गढ़ में आने वाले टूरिस्ट की तादाद में दोगुना इजाफा हुआ है। दिसंबर 2017 में 81,009 टूरिस्ट आए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 40,733 टूरिस्ट पहुंचे थे।

टूरिस्ट रानी पद्मिनी के बारे में जानने को बेताब
व्यास के मुताबिक, “टूरिस्ट रानी पद्मिनी से संबंधित जगहों के बारे में जानने के लिए बेताब हैं। फिल्म पद्मावत को लेकर इतना कुछ होने के बाद चित्तौड़गढ़ को देश में अचानक से इतनी पॉपुलरिटी मिल गई।”

सरकारी गाइड सुनील सेन के मुताबिक, टूरिस्ट इतिहास की पूरी जानकारी के साथ पहुंच रहे हैं और जिन जगहों के बारे में पढ़ा है उन्हें देखने की मंशा जाहिर करते हैं। वे उस आईने के बारे में पूछते हैं, जिसमें अलाउद्दीन को रानी पद्मिनी का चेहरा दिखाया गया था। लोग यह भी जानना चाहते हैं कि रानी पद्मिनी ने 16000 महिलाओं के साथ किस तरह जौहर किया था।

ऐसी भीड़ उमड़ी कि किला बंद करना पड़ा
गाइड सुनील सेन ने बताया कि 31 दिसंबर को तो भीड़ ऐसी उमड़ी की टिकट खत्म हो गए। किले के दरवाजे वक्त से पहले बंद करने पड़े। उदयपुर के एक गाइड अरुण कुमार रेमतिया ने कहा कि झीलों के शहर उदयपुर आने वाले पर्यटक चित्तौड़गढ़ और रानी पद्मिनी के बारे में भी पूछ रहे हैं। कई लोग यहां चित्तौड़गढ़ होते हुए आ रहे हैं। 

उदयपुर के लेक पिछोला होटल की सेल्स मैनेजर श्रुति ने भी इस बात की पुष्टि की है कि शहर में अब तक ज्यादातर विदेशी पर्यटक ही बड़ी संख्या में आते थे, लेकिन इस बार घरेलू पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि देखने को मिली है।
फिल्म पद्मावती को लेकर क्या आपत्ति है?

राजस्थान में करणी सेना, बीजेपी लीडर्स और हिंदूवादी संगठनों ने इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाया। राजपूत करणी सेना का मानना है कि ​इस फिल्म में पद्मिनी और खिलजी के बीच सीन फिल्माए जाने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची। फिल्म में रानी पद्मावती को भी घूमर नृत्य करते दिखाया गया है। जबकि राजपूत राजघरानों में रानियां घूमर नहीं करती थीं।
 हालांकि, भंसाली साफ कर चुके हैं कि ड्रीम सीक्वेंस फिल्म में है ही नहीं।