एमबीबीएस वाले नहीं कर पाएंगे डॉक्टरी की प्रैक्टिस!

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नई दिल्ली।अब एमबीबीएस की डिग्री वाले डॉक्टरी की प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। अगर मेडकिल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) की जगह नैशनल मेडिकल कमीशन (NMC) बिल आ गया तो देश में एमबीबीएस की डिग्री वाले डॉक्टर मरीजों का इलाज नहीं कर पाएंगे, उन्हें प्रैक्टिस के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं मिलेगा।

एक और एग्जाम देना होगा
एनएमसी बिल के अनुसार एमबीबीएस की डिग्री वाले डॉक्टरों को क्वॉलिफाइ करना होगा। उन्हें एक और एग्जाम देना होगा जिसमें पास होने पर ही वो प्रैक्टिस कर पाएंगे। वहीं अब विदेशी डॉक्टरों या विदेश से डिग्री लेकर आने वाले डॉक्टरों को राहत मिलेगी।

अब तक जहां एमसीआई के कानून के तहत ऐसे डॉक्टरों को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए क्वॉलिफाइ एग्जाम पास करना पड़ता था, वहीं नए कानून के तहत उन्हें इससे छूट दे दी गई है। इससे कम मार्जिन से पास होने वाले भारतीय डॉक्टरों की परेशानी बढ़ सकती है।

यही वजह है कि इंडियन मेडिकल असोसिएशन और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के मेंबर सरकार के इस बिल का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि एनएमसी को सरकार चलाएगी और इससे करप्शन ही बढ़ेगा। गौरतलब है कि एनएमसी बिल को मौजूदा संसद सत्र में ही लाया जा रहा है।

इसलिए हो रहा विरोध
इंडियन मेडिकल असोसिएशन के प्रेजिडेंट डॉक्टर के के अग्रवाल ने कहा कि यह पूरी तरह से नाकाम सिस्टम होगा। हम एक साल से मंत्रालय से इस मामले में विमर्श करने को कह रहे हैं, लेकिन वो हमें बुला ही नहीं रहे हैं। यह लागू हो गया तो इससे करप्शन बढ़ेगा।

तीन लोगों की एक कमिटी होगी जो कॉलेज को अप्रूवल देगी और कमिटी में ये तीनों लोग भी नॉमिनेटेड होंगे। पहले 130 लोगों में से 80 लोग चुनकर आया करते थे। यहां तो कोई वॉच डॉग भी नहीं होगा। एमसीआई के मेंबर डॉक्टर विनय अग्रवाल ने कहा कि इस तरह से तो एनएमसी सरकार के हाथ की कठपुतली होगी और इसे सरकार ही चलाएगी।

डॉक्टर के के ने कहा कि इसमें जुर्माना 5 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक का है। इतना बड़ा अंतर क्यों है? इससे मेंबर अपने चाहने वाले को कम और दूसरे को ज्यादा जुर्माना कर सकते हैं।

इसी प्रकार कॉलेज की 40 पर्सेंट सीटों पर ही एनएमसी की नजर होगी, बाकी 60 पर्सेंट सीटों का चयन और उसकी फीस प्राइवेट मेडिकल कॉलेज वाले अपनी मर्जी से करेंगे। इससे प्राइवेट कॉलेज वालों को भारी फायदा होगा जबकि पहले मैनेजमेंट कोटा के तहत कॉलेज के पास केवल 10 पर्सेंट सीट ही होती थीं।