आईआईटी एडमिशन में यूपी को पछाड़ नंबर-1 बना राजस्थान

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आईआईटी ने इनफार्मेशन ब्रोशर से पहले जारी की साल 2016 की रिपोर्ट

कोटा। साल 2014 के बाद राजस्थान ने 2016 में फिर से आईआईटी की सबसे अधिक सीटों पर कब्जा जमाया है। पिछले साल यूपी आगे निकल गया था।

इस साल आईआईटी के एडमिशन में यूपी को पटखनी देते हुए राजस्थान के स्टूडेंट्स एडमिशन और क्वालीफाई करने के आंकड़े में काफी आगे है। आईआईटी ने साल 2016 की जेईई एडवांस की रिपोर्ट जारी की है।

पिछले साल आईआईटी गुवाहटी ने एडवांस का एग्जाम कंडक्ट करवाया था। राजस्थान पहले, यूपी दूसरे, महाराष्ट्र तीसरे, तेलंगाना चौथे और आंध्रप्रदेश पांचवें स्थान पर रहा। मध्यप्रदेश के स्टूडेंट्स आईआईटी ड्रीम को पूरा करने में छठे नंबर पर रहे हैं।

आईआईटी में दाखिले की सक्सेस रेट में हर साल की तरह इस बार भी सीबीएसई के स्टूडेंट्स पहले नंबर पर रहे हैं। इसके बाद तेलंगाना बोर्ड और तीसरे नंबर पर राजस्थान बोर्ड है। चौथे नंबर पर आंध्रप्रदेश का बोर्ड रहा है। आईआईटी यह रिपोर्ट एडमिशन प्रक्रिया पूरी होने और डेटा कलेक्शन के बाद जारी करता है।

सफलता में कोटा का अहम योगदान
आईआईटीएंट्रेंस में राजस्थान के बच्चों की सक्सेस के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर कोटा का स्टडी पैटर्न रहा है। अब आंकड़े भी इस बात का प्रमाण दे रहे हैं। राजस्थान से कुल सलेक्शन में से 90 प्रतिशत स्टूडेंट्स कोटा से जुड़े होते हैं।

कोटा के कॉम्पटीशन, टेस्ट सीरिज, पढ़ाई के पैटर्न के कारण यहां की सक्सेस रेट साउथ से आगे हो गई है। राजस्थान का सीधा मुकाबला तेलंगाना और आंध्रप्रदेश के साथ होता है। साल 2014 में आंध्र तेलंगाना एक ही राज्य में होने के बावजूद राजस्थान ने इस रेस में उनको पीछे छोड़ दिया था।

छग से 117 गुजरात से 205 का एडमिशन
नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ से एडवांस के लिए 2209 स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन हुआ था। इसमें से 453 क्वालीफाइड हुए और 117 स्टूडेंट्स ने आईआईटी में एडमिशन लिया। इसी प्रकार गुजरात से 6295 स्टूडेंट्स रजिस्टर्ड हुए। 1035 ने क्वालीफाई किया और 205 को आईआईटी में एडमिशन मिल पाया।

विदेश से एमबीबीएस के लिए भी नीट जरूरी
विदेश से मेडिकल शिक्षा ग्रहण करने के लिए भी अब नीट देना अनिवार्य होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय अगले साल से इसे अनिवार्य करने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने एमबीबीएस में एडमिशन के लिए चिकित्सा शिक्षा नियम में संशोधन किया था।

इसी प्रकार यदि कोई विदेशी नागरिक भारत में आकर एमबीबीएस करना चाहता है तो उसको भी नीट देना होगा। यदि कोई छात्र बिना नीट दिए ही विदेशी से एमबीबीएस कर डिग्री लेता है तो वह भारत में प्रैक्टिस नहीं कर पाएगा।

विदेशों से डिग्री लेने के बाद देश में होने वाले स्क्रीनिंग टेस्ट में 80 प्रतिशत स्टूडेंट्स फेल हो जाते हैं। एक्सपर्ट शैलेंद्र माहेश्वरी ने बताया कि इस निर्णय के लागू होने के बाद एमबीबीएस के लिए सभी की पात्रता एक जैसी हो जाएगी।