गरीब को भरपेट भोजन दे रही अन्नपूर्णा रसोई-डॉ. संजय मिश्र 

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लाभार्थी को 5 रुपये में नाश्ता, 8 रुपये में दोपहर एवं रात्रि का भोजन

जयपुर। लोकतांत्रिक सरकारों का सबसे बड़ा और सर्वाधिक प्राथमिकता वाला एजेंडा है कि सभी नागरिकों को रोजगार चाहे मिले या ना मिले, लेकिन हर शख्स को भरपेट भोजन जरूर मिले। भोजन की सुनिश्चितता के लिए विश्व में बहुत से देशों में कई तरह के कानूनी प्रावधान भी रखे गए हैं, इसमें भारत भी कोई अपवाद नहीं है।

यहां भी कई कानून बने, लेकिन राजस्थान की वसुंधरा सरकार ने इस आदर्श ध्येय को ध्यान में रखते हुए इससे दो कदम आगे बढ़कर एक ऎसा अभिनव प्रयोग शुरू किया, जिससे सीधे गरीब और वंचितों को बहुत ही सामान्य शुल्क पर भोजन उपलब्ध हो रहा है। अर्थात् गरीब की पहुंच में अब अन्नपूर्णा की रसोई आ गई है। 

एक नई शुरुआत- 
‘सबके लिए भोजन-सबके लिए‘ सम्मान के ध्येय वाक्य के साथ इसकी विधिवत् शुरुआत 31 अक्टूबर, 2015 प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने की। अन्नपूर्णा रसोई योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 के बजट में भी घोषणा की गई कि राज्य के सभी 191 नगर निकायों में लगभग 500 स्मार्ट रसोई वैनों का संचालन किया जाएगा।

इस योजना के माध्यम से प्रतिदिन 4 लाख, 50 हजार जरूरतमंद लोगों को रियायती दर पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाकर लाभान्वित किया जाएगा। अन्नपूर्णा रसोई योजना की कार्यकारी एजेन्सी निदेशालय, स्थानीय निकाय विभाग है। 

कमजोर तबके हो रहे लाभान्वित  
इस योजना में मुख्य रूप से श्रमिक, रिक्शा और ऑटो चालक, कर्मचारी, विद्यार्थी, कामकाजी महिलाएं, बुजुर्ग एवं अन्य असहाय व्यक्ति एवं आम नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं। अन्नपूर्णा रसोई योजना के अन्तर्गत नई निविदा में प्रति वैन नाश्ता, दोपहर का भोजन एवं रात्रि भोजन की संख्या को 100 से बढ़ाकर 300 कर दिया गया है।

लाभार्थी को 5 रुपये में नाश्ता, 8 रुपये में दोपहर एवं रात्रि का भोजन दिया जा रहा है। लंच की असल कीमत 23.70 रुपए और नाश्ते की 21.70 रुपए है। कीमत में जितना अंतर है, वो राज्य सरकार वहन कर रही है। शीघ्र ही पूरे राज्य में इसे लागू किया जाएगा। 
 
हाईटेक और हाईजीन वैन से वितरण  
इस योजना में उपलब्ध कराए जाने वाले नाश्ते एवं भोजन को पूर्णतयारू स्वचालित प्लान्ट से स्वच्छता एवं खाद्य सुरक्षा के मापदंड़ों के अनुसार तैयार करवाया जा रहा है, जिसकी गुणवत्ता की जांच लैब से कोई भी करवा सकता  है। हॉस्पीटेलिटी में दक्ष और प्रशिक्षित लोगों के जरिए ये सामग्री तैयार की जाती है।

योजना में स्मार्ट रसोई वैनों का प्रावधान है, जो सीसीटीवी कैमरे, स्क्रीन इत्यादि से सुसज्जित रहेंगी। इसके साथ ही भोजन में माइक्रोन्यूट्रेंट का भी उपयोग किया जाएगा। इस योजना में पूर्णतया ई-मॉनिटरिंग सिस्टम को अपनाया जा रहा है, जिसके लिए निविदादाता द्वारा निदेशालय में स्वयं के खर्चे पर मॉनिटरिंग सिस्टम की व्यवस्था की गई है। 

कैलोरी और क्वालिटी से भरा फूड 
अन्नपूर्णा रसोई वैनों के माध्यम से दिये जाने वाले नाश्ते की मात्रा को 250 ग्राम से बढ़ाकर 350 ग्राम तथा दोपहर एवं रात्रि के भोजन की मात्रा को 350 से बढ़ाकर 450 ग्राम किए जाने का प्रावधान किया गया है।

नाश्ता एवं भोजन की रेसिपी बनाते समय मल्टीग्रेन (मक्का, ज्वार, बाजरा, चावल एवं गेहूं) तथा दालों का कॉम्बीनेशन इस प्रकार बनाया गया है कि उपभोक्ता को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेड मिले। दोपहर एवं रात्रि भोजन में चावल की चार रेसिपी, गेहूं की चार रेसिपी, चार मीठा खीचड़ा रेसिपी एवं चार नमकीन खीच रेसिपी भी रखी गई हैं।

उपभोक्ता को एक बार के भोजन में थाली में चारों रेसिपी सर्व की जाती है, जिससे उपभोक्ता को चावल, गेहूं, मीठा एवं नमकीन की रेसिपी पूर्ण भोजन का आनन्द प्रदान करे।

फिर भी यह उपभोक्ता की इच्छा पर होगा कि वह कोई भी एक अथवा दो आईटम भी अपनी सुरूचि से ले सकता है। इसी प्रकार नाश्ते में भी सेवईयां, पोहा, उपमा एवं इडली-सांभर में से भी उपभोक्ता कोई भी तीन अथवा एक आईटम ले सकता है। 

योजना का संचालन और विस्तार     
बजट घोषणा के क्रियान्वयन के क्रम में खुली निविदाओं के माध्यम से कार्यकारी एजेन्सी-जीवन सम्बल चेरिटेबल ट्रस्ट, कोटा को अनुबन्धित किया गया है, जिसके माध्यम से अन्नपूर्णा रसोई वैनों का संचालन किया जा रहा है। अन्नपूर्णा रसोई योजना के प्रथम चरण में 12 शहरों में 80 रसोई वैनों का संचालन किया जा रहा है।

13 अक्टूबर, 2017 तक संस्था द्वारा जयपुर में 25, उदयपुर में 5, झालावाड़ में 4, बारां में 2, बांसवाड़ा में 3, प्रतापगढ़ में 2, बीकानेर में 5, डूंगरपुर में 2, भरतपुर में 5, अजमेर में 5, जोधपुर में 5 तथा कोटा की 10 रसोई वैनों सहित कुल 73 रसोई वैनों का संचालन किया जा रहा है, जिनके माध्यम से लगभग 21000 व्यक्ति प्रतिदिन लाभान्वित हो रहे हैं।