भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के नए प्रावधान सख्त किए

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भर्ती होने पर उसी दिन डॉक्यूमेंट जमा नहीं कराए तो भामाशाह के लाभ से वंचित रह जाएंगे मरीज

कोटा। नए प्रावधानों के साथ लागू हो रही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के नियम इतने पेचीदा हो गए हैं कि अब लाभार्थियों की संख्या घटना तय है। ऐसे-ऐसे प्रावधान कर दिए, जिन्हें लेकर खुद अधिकारी सवाल उठा रहे हैं। नए प्रावधान गुरुवार से लागू हो गए हैं। जानिए,क्या रही हैं समस्याएं-

वेब कैमरे पर ही खिंचवानी होगी फोटो : मरीजों को भर्ती करने डिस्चार्ज करते वक्त वेब कैमरे पर ही फोटो खिंचवानी होगी। इससे मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में काउंटरों पर मरीजों की भारी भीड़ लगना तय है। पहले यह होता था कि वार्ड में भर्ती मरीज का बेड साइड मोबाइल से खिंचा हुआ फोटो मान लिया जाता था, लेकिन अब वह विशेष परिस्थिति के लिए रखा गया है और उसमें भी अलग से एक प्रपत्र भरना होगा।

हार्ट अटैक आए तो पहले जरूरी कागज संभालें
रात 11 बजे किसी को हार्ट अटैक आया। वह सीधे सरकारी अस्पताल में गया तो जाहिर तौर पर उसे आईसीयू में ही एडमिट किया जाएगा। अब यदि 1 घंटे यानी रात 12 बजे तक भामाशाह के डॉक्यूमेंट्स जमा नहीं कराए तो वह मरीज योजना के लाभ से वंचित हो जाएगा। डे केयर के सभी प्रोसीजर में भी मरीज को 1 घंटे में दस्तावेज जमा कराने होंगे। सामान्य केस में उसी दिन टीआईडी जनरेट करनी होगी, यानी सुबह 10 बजे आए मरीज को 14 घंटे मिलेंगे और रात 11 बजे आए मरीज को सिर्फ 1 घंटा। पहले यह समय 48 घंटे तक था

 

पैकेज में बदलाव सिर्फ 72 घंटे में: योजना के तहत 72 घंटे के बाद पैकेज में बदलाव नहीं कर सकते। अब यदि किसी मरीज का ट्रीटमेंट लंबा चला और बाद में उसके पैकेज में बदलाव की जरूरत हुई तो कुछ नहीं हो सकता?

पहले इसके लिए सुविधा थी कि मरीज के डिस्चार्ज होते वक्त बदलाव किया जा सकता था। मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में कार्यरत स्वास्थ्य मार्गदर्शक बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में पैकेज में चेंज होता था।

घट गई प्राइवेट हॉस्पिटलों की संख्या: पूरे संभाग में प्राइवेट हॉस्पिटलों की संख्या घटकर एक चौथाई रह गई। कोटा शहर में 43 में से सिर्फ 7 अस्पताल नए प्रावधानों के तहत भामाशाह मरीजों को लाभान्वित कर पाएंगे।

ऐसे में इन अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ेगी। संभाग स्तर पर न्यूनतम पलंग क्षमता 50 कर दी गई है। वहीं, जिला मुख्यालय पर 25 पलंग क्षमता रखी है। बारां, बूंदी झालावाड़ में भी इक्कादुक्का ही अस्पताल इस दायरे में रहेंगे।

सरकारी अस्पतालों को नहीं मिलेगा डिलेवरी का क्लेम : सरकारीअस्पताल सामान्य या सीजेरियन डिलेवरी का कोई पैकेज बुक नहीं कर पाएंगे। यह पैकेज सिर्फ प्राइवेट हॉस्पिटल ही बुक कर पाएंगे। इससे सरकारी अस्पतालों को बड़ा नुकसान होगा। 

सरकारी अस्पतालों में होने वाली डिलेवरी पर उन्हें बीमा कंपनी से लाखों रुपए का क्लेम मिल रहा था, जो वहां के विकास में काम रहा था, लेकिन अब सब बंद हो जाएगा। पीडियाट्रिक सर्जरी गायनी के पैकेज की संख्या काफी कम हो गई। अब यदि इस तरह के मरीज आएंगे तो उन्हें कैसे बुक किया जाएगा, यह कोई नहीं बता पा रहा।