नकल करके तैयार किए गए थीसिस को पकड़ेगा सॉफ्टवेयर

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सभी तकनीकी विश्वविद्यालय में लगेगा यह सॉफ्टवेयर

कोटा। टेक्निकल यूनिवर्सिटी रिसर्च सेंटर्स पर रिसर्च और प्रोजेक्ट वर्क की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने सख्ती बरती है। अब सभी तकनीकी यूनिवर्सिटी को प्लैगरिज्म सॉफ्टवेयर के जरिए थीसिस और प्रोजेक्ट वर्क को क्रॉस चेक करना होगा। इस साॅफ्टवेयर के जरिए पुरानी थीसिस की नकल पकड़ी जाएगी।

ये साॅफ्टवेयर लगने के बाद छात्र-छात्राओं का वास्तविक काम सामने जाएगा। अभी तक प्लैग चेक की सुविधा नहीं होने के कारण थीसिस की चैकिंग अन्य जगहों पर करवानी पड़ती थी। खास बात यह है कि टेक्निकल यूनिवर्सिटी होने के बावजूद नकल काे रोकने के लिए यह साॅफ्टवेयर अब तक यूनिवर्सिटी नहीं लगा पाई थी।

इस साल रिसर्च कर रहे हैं आरटीयू के 50 स्टूडेंट्स
2016-17 में आरटीयू के 50 स्टूडेंट्स ने रिसर्च वर्क शुरू किया है। साल 2009 से 2016 तक मात्र 15 स्टूडेंट्स ही पीएचडी हासिल कर पाए हैं। 10 पीएचडी थीसिस सबमिट की जा चुकी है। शेष स्काॅलर्स की पीएचडी अभी चल रही है।

सभी यूनिर्सिटी का डेटा रहता है प्लैगरिज्म सॉफ्टवेयर में : इस सॉफ्टवेयर में देश की सभी प्राइवेट और सरकारी यूनिवर्सिटी की थीसिस का डेटा रहता है। यूनिवर्सिटी की ओर से नई थीसिस अपलोड करके एक कमांड देते ही सॉफ्टवेयर बता देता है कि ये किसी पुरानी थीसिस की नकल है या नहीं।

कॉपी किए गए सेंटेंस परपल कलर में हो जाते हैं। यूनिवर्सिटीज आम तौर पर 20 से 30% कंटेंट मैच होने की छूट देती हैं। इससे ज्यादा कंटेंट मैच होने पर थीसिस रिजेक्ट होती है।