अब कोई भी बोर्ड 12वीं में नहीं देगा बढ़ाकर मार्क्स

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नई दिल्ली। CBSE सहित सभी स्टेट एजुकेशन बोर्ड्स ने मिलकर तय किया है कि इस साल से कोई भी बोर्ड 12वीं एग्जाम में मार्क्स मॉडरेट नहीं करेगा। यानी नंबर बढ़ाकर नहीं दिए जाएंगे। साथ ही इस पर भी सहमति बन गई है कि बोर्ड्स चाहें तो पास करने के लिए दिए जाने वाले ग्रेस मार्क्स जारी रख सकते हैं लेकिन सभी बोर्ड्स को स्टूडेंट की मार्कशीट पर इसका जिक्र करना होगा साथ ही अपने पोर्टल में बताना होगा कि ग्रेस मार्क्स का क्या सिस्टम है।

HRD मिनिस्ट्री के स्कूल एजुकेशन सेक्रेटरी अनिल स्वरूप की मौजूदगी में CBSE सहित सभी स्टेट बोर्ड के प्रतिनिधियों की मीटिंग हई। CBSE ने HRD मिनिस्ट्री से अपील की थी कि मॉडरेट मार्किंग और ग्रेस मार्क्स को लेकर सभी बोर्ड की एक समान व्यवस्था होनी चाहिए।CBSE ने HRD को भेजे अपने प्रपोजल में कहा था कि सभी एजुकेशन बोर्ड मिलकर मॉडरेट मार्किंग और ग्रेस मार्किंग को खत्म करें क्योंकि अगर सिर्फ CBSE ऐसा करेगा तो इससे CBSE से पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को कॉलेज में ऐडमिशन के वक्त नुकसान होगा।

अनिल स्वरूप ने लेन-देन न्यूज़ को बताया कि मीटिंग में सभी एजुकेशन बोर्ड के बीच यह सहमति बन गई है कि इस साल से कोई भी बोर्ड 12वीं में मॉडरेट मार्किंग नहीं करेगा। स्टूडेंट्स की आंसर शीट के हिसाब से ही नंबर दिए जाएंगे और ऐसे ही किसी के नंबर नहीं बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ग्रेस मार्क्स पर यह तय किया गया है कि जो भी एजुकेशन बोर्ड चाहें वे स्टूडेंट्स को पास करने के लिए ग्रेस मार्क्स जारी रख सकते हैं लेकिन उन्हें इसके लिए एक पारदर्शी व्यवस्था बनानी होगी।

इस व्यवस्था की पूरी जानकारी बोर्ड को अपने पोर्टल में भी देनी होगी ताकि सब लोग जान सकें कि किसी को ग्रेस मार्क्स दिए जा रहे हैं तो किस आधार पर दिए जा रहे हैं। साथ ही ग्रेस मार्क्स देने वाले सभी एजुकेशन बोर्ड को स्टूडेंट की मार्कशीट पर साफ तौर पर यह लिखना होगा कि कितने ग्रेस मार्क्स दिए गए हैं। अभी तक कोई बोर्ड ऐसा कर रहा था और कोई ऐसा नहीं कर रहा था।

स्वरूप ने बताया कि मीटिंग में सभी स्टेट एजुकेशन बोर्ड ने इस पर भी सहमति जताई कि उन्हें NCERT के करिक्यूलम को फॉलो करना चाहिए। इस पर सहमति बनी कि कम से कम सायेंस और मैथ्स जैसे सब्जेक्ट, जो स्टेट स्पेसिफिक नहीं होते उनमें सभी एजुकेशन बोर्ड NCERT के करिक्यूलम को ही लागू करें। स्वरूप ने उम्मीद जताई कि जल्दी ही यह लागू हो जाएगा।

मॉडरेट मार्किंग बंद करने को लेकर सभी एजुकेशन बोर्ड इस पर सहमत थे कि इसे सभी बोर्ड में एकसाथ लागू करके ही फायदा है। पिछले साल यह फैक्ट सामने आने के बाद CBSE की आलोचना भी हुई कि CBSE ने 12वीं के बोर्ड एग्जाम में मैथ्स में अधिकतम 16 मार्क्स तक बढ़ाकर दिए हैं। मॉडरेट मार्किंग की वजह से छह साल में CBSE में 95 पर्सेंट या इससे ज्यादा मार्क्स लाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 23 गुना बढ़ी है। 2008 में जहां 384 स्टूडेंट्स को 95 पर्सेंट या इससे ज्यादा मार्क्स मिले थे, वहीं 2014 में ऐसे स्टूडेंट्स की संख्या 8971 रही।