मिस कॉल से खेत का पंप और सोलर एनर्जी से चलेगा घास कटर

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कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी में लगी साइंस एग्जीबिशन, स्टूडेंट्स ने मध्यम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किए मॉडल

कोटा। तकनीकी युग में शहरी क्षेत्र में प्रत्येक काम तकनीक आधारित है। चाहे गगनचुंबी इमारतों में छत तक जाने के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल हो या विदेश में बैठकर सीसीटीवी कैमरों से मोबाइल के जरिए घर की निगरानी।

ऐसे ही कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने नवाचार कर गांव और किसानों के लिए नए मॉडल बनाए हैं। इसमें मिस कॉल से खेत का पंप चलेगा और सोलर एनर्जी से घास कटर। यह सब कुछ यूनिवर्सिटी कैंपस में हुए साइंस एग्जीबिशन में देखने को मिला। यहां नौ विभागों के स्टूडेंट्स ने इन्हें तैयार किया।

वीसी डॉ. डीएन राव ने बताया कि एग्जीबिशन में रखे मॉडल में अपनाई तकनीक किफायती है। ताकि आम आदमी इसका उपयोग आसानी से कर सके। संयोजक सीतेश कुमार ने बताया कि एक्जीबिशन में 462 मॉडल प्रदर्शित किए हैं।

किसानों के लिए बनाई साइकिल टिलर : एग्रीकल्चर बीएससी सेकंड ईयर की स्टूडेंट्स खान अमरीन, पीयूष गालव, यतीश, साक्षी सिंह शुभम ने किसानों के लिए उपयोगी प्रोजेक्ट बनाया। इसका नाम साइकिल टिलर है। बड़े खेतों में गुड़ाई आदि का काम ट्रैक्टर आदि के जरिए होता है, लेकिन छोटी जगहों पर काफी परेशानी आती है।

ऐसे में मात्र 4 हजार रुपए की लागत से तैयार साइकिल टिलर का उपयोग छोटे पॉली हाउस आदि जगहों पर आसानी से किया जा सकता है। इसकी खासियत है कि यह छोटी से छोटी जगह में काम कर सकता है। इसे व्यक्ति खुद हाथ से संचालित कर सकता है। ऐसे में डीजल की जरूरत भी नहीं होती है।

मोबाइल से खेती की सिंचाई : ड्युअलटोन मल्टीपल फ्रिक्वेंसी सिस्टम (डीटीएमएफ) है। यह मोबाइल से जुड़ा है। मिस कॉल करने पर मोटर चलने के साथ खेती की सिंचाई शुरू होती है। एमएससी जूलॉजी स्टूडेंट्स विशाल गुप्ता और त्रिलोक बंजारा ने बताया कि यह ऐसा फार्मूला बनाया है जो मोबाइल के जरिए विद्युत उपकरणों को कंट्रोल कर सकता है।

सिर्फ 4 हजार रुपए की लागत से इसे असेंबल करना बहुत आसान है। ऑटो कॉल रिसीवर से युक्त मोबाइल को डीटीएमएफ से जोड़ा है। कॉल करने पर यह इनकोड को डिकॉड करता है, और एक फिक्स नंबर के बटन को दबाते ही आटोमैटिक रिसीवर ऑन हो जाता है। टाइमर की मदद से संबंधित पंप को ऑफ किया जा सकता है।

मोबाइल से ऑपरेट होगा घास कटर: बगीचों में घास काटने के लिए ग्रास कटर का उपयोग होता है। जो कि पूर्णतया बिजली पर आधारित है। इसके अलावा इसमें मैन पॉवर भी जरूरी है। इसमें बिजली समय काफी खर्च होता है। यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिकल ब्रांच के स्टूडेंट्स आशीष नागर, अखिलेश सैनी निशांत पब्बी ने सोलर ग्रास कटर का मॉडल बनाया है।

3 हजार रुपए इसकी लागत आई जो सौर ऊर्जा से चलता है। इसे मोबाइल से भी ऑपरेट किया जा सकेगा। इसमें विशेष तकनीक से सोलर एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदला है। सौर ऊर्जा के लिए इसमें बैटरी है।