भारत की विकास दर में गिरावट का दौर जल्दी ही थमेगा

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नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट का दौर 5 तिमाहियों के बाद थमने वाला है। रॉयटर्स पोल के मुताबिक तीन साल के न्यूनतम स्तर के बाद सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर जुलाई-सितंबर तिमाही में ऊपर की ओर बढ़ने वाली है। इसके मुताबिक, नोटबंदी के बाद संकुचन से उबरते हुए डिमांड में तेजी आ रही है।

भारतीय अर्थव्यवस्था 2016 में सबसे तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा अचानक नोटबंदी की घोषणा करने से उपभोक्ताओं की व्यय करने की क्षमता प्रभावित हुई।

इस साल जुलाई में सरकार ने गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) को लागू किया। टैक्स सिस्टम में यह बड़ा बदलाव अर्थव्यवस्था के लिए एक और झटका था।

लेकिन रॉयटर्स पोल के मुताबिक, 52 फीसदी अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि भारत की GDP में संभवतः इस वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में 6.4 फीसदी ग्रोथ हासिल हो सकता है।

पिछली तिमाही में यह 5.7 फीसदी थी। गुरुवार को जारी होने वाले आंकड़े यदि उम्मीद के मुताबिक हुए तो 5 तिमाहियों से जारी गिरावट पर ब्रेक लगेगा और इस कैलेंडर ईयर का सबसे अच्छा ट्रेंड होगा। जीडीपी का दर 5.9 फीसदी से 6.8 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है।

इधर, एएनजेड के अर्थशास्त्री शशांक मेंदीरत्ता लिखते हैं, ‘भारत की GDP की रफ्तार थमने वाली है, हालांकि यह धीमी गति से चलेगी। इसकी वजह GST के कारण आपूर्ति में आई बाधा है।’

एएनजेड ने GDP के 6.2 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने के आसार जताए है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि, त्योहारी मौसम की मांग के कारण जीडीपी में ग्रोथ दिखा है।

औद्योगिक उत्पादन में भी वृद्धि देखी गई है।’ उनका इशारा मध्य अक्टूबर में दिवाली की छुट्टी की तरफ था जिस दौरान लोगों के व्यय में अमूमन तेजी देखी जाती है।

बिजनस सर्वे में औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्र के आंकड़े में सुधार को दर्शाया गया है। बीएसई सेंसेक्स में दर्ज शीर्ष शेयर रेकॉर्ड स्तर पर रहे हैं।

दरअसल, किसी भी अर्थशास्त्रियों ने विकास दर 5.7 फीसदी से नीचे रहने की संभावना नहीं जताई है। लेकिन कुछ अर्थशास्त्रियों ने 8 प्रतिशत से ऊपर की विकास दर वापस लौटने का भी अनुमान जताया है।

रॉयटर्स पोल ने भारत के ग्रॉस वेल्यु-ऐडड ग्रोथ के 6.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। अक्टूबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई की दर 7 महीनों में सबसे अधिक 3.6 प्रतिशत रही।

तेल और अन्य उत्पादों की कीमत हाल के महीनों में बढ़ी है। इस बीच सरकार ने अगले दो सालों में अपने बैकों को फिर से कैपिटलाइज करने के लिए 32.43 अरब डॉलर की योजना तैयार की है।