बैंकरप्सी समिति के सदस्य ने अध्यादेश पर उठाया सवाल

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मुंबई। बैंकरप्सी लॉ पर बनी समिति के एक सीनियर मेंबर ने उस अध्यादेश पर सवाल उठाया है, जिसके जरिये दिवालिया कंपनी के प्रमोटरों को अपनी कंपनी पर दोबारा कंट्रोल करने के रास्ते बंद कर दिए गए हैं।

सरकार की बैंकरप्सी लॉ रिफॉर्म्स समिति के सदस्य एम आर उमरजी ने कहा कि अध्यादेश का फोकस सिर्फ बड़े बॉरोअर्स पर है। हालांकि, इससे दूसरे चांस की कोशिश कर रहीं छोटी और मझोली कंपनियों को नुकसान हो सकता है। इससे डिफॉल्ट करने वाली कंपनियां औनेपौने दाम में बिकने को मजबूर हो सकती हैं।

उमरजी ने कहा, ‘दिवालिया कानून के मामले में ज्यादातर चर्चा बड़ी कंपनियों को लेकर हुई है। हालांकि, अध्यादेश की वजह से बैंकों को लोन के बड़े हिस्से को भूलना होगा। ऐसी छोटी और मझोली कंपनियां भी हैं, जिनके प्रमोटर को कंपनी से अलग करके देखना मुश्किल है।

इन कंपनियों को चलाने की सबसे अधिक योग्यता प्रमोटर ही रखते हैं। इन कंपनियों में बाहरी निवेशकों की दिलचस्पी भी कम रह सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि छोटी कंपनियों की लोन रिस्ट्रक्चरिंग से बैंकों को बहुत नुकसान नहीं होगा। क्या आप ऐसे प्रमोटरों को अपनी कंपनी को दोबारा खड़ा करने का मौका नहीं देंगे?

बड़ी स्टील या सीमेंट कंपनी को खरीदने के लिए कई निवेशक सामने आ सकते हैं, लेकिन तिरुपुर की छोटी दिवालिया टेक्सटाइल यूनिट या अंकलेश्वर की ऐसी केमिकल यूनिट में कितने लोग दिलचस्पी लेंगे?’  उन्होंने कहा कि कोई धूर्त कॉम्पिटीटर इस अध्यादेश का फायदा उठाकर दिवालिया हो चुकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी को बंद करवा सकता है।

ऐसे ‘शिकारी’ संबंधित कंपनी का कुछ लोन या डेट खरीद सकते हैं और उसे बंद कराने के लिए बैंकरप्सी कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं। इससे संबंधित सेक्टर में कॉम्पिटीशन कम होगा और शिकार करने वाली कंपनी को अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलेगा।

ऐसे मामलों में दिवालिया छोटी कंपनी का प्रमोटर कुछ नहीं कर पाएगा। सरफेसी कानून के पीछे भी उमरजी का दिमाग माना जाता है। इस कानून में बैंकों को लोन रिकवरी के लिए डिफॉल्ट कर चुकी कंपनी की प्रॉपर्टी बेचने की इजाजत दी गई है। उमरजी ने उम्मीद जताई कि सरकार बैंकरप्सी कानून में और बदलाव कर इस गड़बड़ी को दूर करेगी।