रोजगार सृजन योजनाओं का सच, चयनित में से बैंक 8% को भी नहीं दे रहे लोन

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 सरकार ने 8 माह में 17,242 को चुना, बैंकों ने 1,410 को ही दिया लोन

जयपुर। केंद्र राज्य सरकार ने भले ही बेरोजगारों को आसान सस्ता लोन देने के लिए योजनाएं चला रखी हैं, लेकिन बैंक इनमें रोड़े अटका रहे हैं।

यही कारण है कि सरकारी एजेंसियों ने केंद्र की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन तथा राज्य सरकार की भामाशाह रोजगार सृजन योजना के तहत 8 माह में 17,242 बेरोजगारों को लोन देने की सिफारिश की।

लेकिन बैंकों ने महज 1,410 के लिए ही लोन मंजूर किया। यानी 100 चयनितों में से महज 8 को ही लोन दिया गया।नामित एजेंसियां राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी की बैठक में लगातार इस मुद्दे को उठा रही हैं और बैंकों को पत्र भेजकर लक्ष्य के अनुरूप लोन स्वीकृत करने को कहा जा रहा है।

इसके बावजूद बैंक केवाईसी जांच अन्य कारणों का हवाला देते हुए लोन धीमे मंजूर कर रही है। प्राइवेट बैंकों का स्कोर तो इस मामले में शून्य तक है। नामित एजेंसियों के अफसरों का कहना है कि बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए लोन देने को लेकर बैंक गंभीर नहीं हैं।

जिनको लोन दिया गया, उनसे भी बहुत चक्कर लगवाए गए। जिनको लोन मिला या तो वो पहले से ही बैंक के ग्राहक हैं या फिर सिफारिशी लोग हैं। सरकारी विभागों के सबसे ज्यादा खाते एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े सरकारी बैंकों में हैं। इसके बावजूद बैंक लोन देने में कोताही बरत रहे हैं।

प्राइवेट बैंक तो रोजगार सृजन योजनाओं के तहत लोन देने में कतई रुचि नहीं ले रहे हैं। केवल आईसीआईसीआई बैंक ने 100 प्रस्तावों के एवज में केवल 3 लोगों को लोन दिया। जबकि एचडीएफसी बैंक जैसे दूसरे बैंकों प्राइवेट बैंकों का स्कोर तो इस मामले में शून्य है। 

जयपुर में पिछले 8 माह में सिर्फ 34 लोन मंजूर
भामाशाह रोजगार सृजन योजना के तहत 10,618 आवेदन स्वीकृत हुए। 879 को लोन दिया गया। पीएमईजीपी के तहत 6624 में से 531 को ही लोन मिला।

जयपुर में दोनों योजनाओं में 738 आवदेन आए, लेकिन 34 को ही लोन दिया गया। इनमें से भामाशाह योजना में 13 लोन मंजूर हुए। इस साल प्रदेश में 17,187 लोगों को इन योजनाओं के तहत लोन दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। बड़ा सवाल ये है कि इस वित्त वर्ष के तहत मार्च 2018 तक ये लक्ष्य कैसे पूरा होगा? 

ऐसे मिलता है फायदा : पीएमईजीपी के तहत सरकार बेरोजगार को 25 लाख रु. तक के लोन के लिए विभिन्न श्रेणियों में 15 से 35 फीसदी तक मार्जिन मनी अनुदान देती है।

हालांकि अनुदान की यह राशि तीन साल के बाद रिलीज की जाती है। भामाशाह योजना में ब्याज में आठ फीसदी का अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान राशि हर तिमाही बैंकों को मिल जाती है।

इस तरह योजनाओं के तहत लोन लेना सस्ता पड़ता है और बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए लोन लेना आसान हो जाता है। वैयक्तिक उद्यमी, संस्थान, कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी, सेल्फ हेल्प ग्रुप तथा ट्रस्ट ये लोन ले सकते हैं।

जिन बेरोजगारों को नामित एजेंसियां मंजूर करेगी, उनको सार्वजनिक क्षेत्र के 27 बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, कॉ-ऑपरेटिव बैंक, सूचीबद्ध प्राइवेट बैंक से लोन मिल सकेगा। लाभार्थी केवीआईसी, केबीआईबी तथा जिला उद्योग केंद्रों के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

एजेंसियां बोली, बैंक कर रहे खानापूर्ति
लोन की रिकवरी आसान है। फिर भी बैंक खानापूर्ति कर रहे हैं। -एल.सी जैन, संयुक्त निदेशक, उद्योग
बैंकर्सकमेटी रिजर्व बैंक में कई बार मसला उठाया। बैंक लोन देने को लेकर गंभीर नहीं है।
-आर.के आमेरिया, मुख्य महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र

बैंकबोले,अब लाएंगे लोन देने में तेजी
पांच बैंकों के विलय की प्रक्रिया अन्य कारणों से लोन देने की प्रक्रिया धीमी रही, अब तेजी लाएंगे
-विजयरंजन, मुख्य महाप्रबंधक, एसबीआई