बिना बदलाव के पद्मावती की रिलीज ना हो: स्मृति से वसुंधरा की अपील

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जयपुर। पद्मावती की रिलीज को लेकर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने शनिवार रात ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्टर स्मृति ईरानी को एक खत लिखा। खत में वसुंधरा ने लिखा, “इस बात को निश्चित करेें कि फिल्म जरूरी बदलावों के बिना रिलीज ना की जाए।”

पद्मावती पर जारी विवाद के बीच राजस्थान सरकार की ओर से ये पहला ऑफिशियल कम्युनिकेशन है। बता दें कि फिल्म सेंसर बोर्ड ने भी मेकर्स को टेक्निकल वजहों से पद्मावती लौटा दी है। उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि सर्टिफिकेशन के लिए एप्लीकेशन अधूरी थी। फिल्म 1 दिसंबर को रिलीज की जानी है।

पद्मावती की रिलीज पर और क्या लिखा वसुंधरा राजे ने?
– राजस्थान की सीएम ने लिखा, “पद्मावती फिल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले सेंसर बोर्ड सभी संभावित नतीजों पर विचार कर ले।”
– “इतिहासकारों, फिल्म एक्सपर्ट और राजपूत कम्युनिटी के मेंबर्स की कमेटी बनाई जानी चाहिए, ताकि फिल्म के सब्जेक्ट को देखा जा सके और जरूरी बदलाव किए जा सकें ताकि किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत ना हों।”

डेलिगेशन ने की वसुंधरा से मुलाकात
– “फिल्ममेकर को अपनी समझ के हिसाब से फिल्म बनाने का अधिकार है। लेकिन, संविधान में ये भी लिखा है कि लोगों की भावनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए इन अधिकारों को कंट्रोल किया जाए। फिल्म की रिलीज पर दोबारा किया जाना चाहिए।”
– इससे पहले मेवाड़ रीजन के डेलिगेशन ने वसुंधरा से मुलाकात की। इसमें अर्बन डेवलपमेंट मििनस्टर श्रीचंद कृपलानी, चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान भी शामिल थे।

पद्मावती की प्राइवेट स्क्रीनिंग पर सेंसर बोर्ड खफा
– सेंसर बोर्ड के चेयरमैन प्रसून जोशी ने न्यूज एजेंसी से कहा, “सेंसर बोर्ड ने अभी तक न तो फिल्म देखी और न ही इसे सर्टिफिकेट दिया। लेकिन इसके मेकर्स की ओर से प्राइवेट स्क्रीनिंग करना और नेशनल चैनल्स पर फिल्म का रिव्यू करना बेहद अफसोसजनक है।”
– उन्होंने कहा, “एक तरफ फिल्म रिलीज की प्रॉसेस में तेजी लाने के लिए सेंसर बोर्ड पर दबाव डाला जा रहा है, दूसरी तरफ बोर्ड की प्रॉसेस को ही खत्म करने की कोशिश की जा रही है।”

फिल्म पद्मावती को लेकर क्या आपत्ति है?
– राजस्थान में करणी सेना, बीजेपी लीडर्स और हिंदूवादी संगठनों ने इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। राजपूत करणी सेना का मानना है कि ​इस फिल्म में पद्मिनी और खिलजी के बीच इंटीमेट सीन फिल्माए जाने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है। लिहाजा, फिल्म को रिलीज से पहले पार्टी के राजपूत प्रतिनिधियों को दिखाया जाना चाहिए।

कहां से शुरू हुआ विवाद?
– राजस्थान में फिल्म शूटिंग के दौरान इसके विरोध की शुरुआत हुई थी। शूटिंग के वक्त राजपूत करणी सेना ने कई जगह प्रदर्शन किया था और पुतले फूंके थे। जयपुर में शूटिंग के दौरान कुछ लोगों ने संजय लीला भंसाली से बदसलूकी की थी, जिसके बाद कोल्हापुर में फिल्म का सेट लगाया तो यहां भी इसे जला दिया गया।

अब तक क्या हुआ?
– विरोध मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और कर्नाटक तक पहुंच गया है।
– राजस्थान की राजपूत करणी सेना के अलावा राजघराने भी फिल्म के खिलाफ हैं। इनकी मांग है कि इसे रिलीज करने के पहले उन्हें दिखाई जाए।
– राजनाथ सिंह, उमा भारती, लालू प्रसाद यादव, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं ने बयान दिए कि लोगों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए।
– गुरुवार को राजपूतों ने चितौड़गढ़ का किला बंद रखकर प्रदर्शन किया था।
– करणी सेना के महिपाल मकराना ने कहा, “राजपूत कभी महिलाओं पर हाथ नहीं उठाते, लेकिन जरूरत पड़ी तो हम दीपिका पादुकोण का वही हाल करेंगे, जो लक्ष्मण ने सूर्पणखा का किया था।”
– संभल में प्रोटेस्टर्स ने पोस्टर लगाए गए। इनमें लिखा था कि संजय लीला भंसाली का सिर काटने वाले को 50 लाख इनाम।