अब आसान नहीं होगा दिवालिया घोषित होना

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कठोर हुई दिवाला शोधन योजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया

नई दिल्ली। दिवाला शोधन योजनाओं (रेजॉलुशन प्लान्स) की स्वीकृति प्रक्रिया को अब पहले से कठोर कर दिया गया है। अब स्वीकृति से पहले आवेदक का पुराना इतिहास और उसकी विश्वसनीयता भी खंगाली जाएगी।

भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (इनसॉल्वंसी ऐंड बैंकरप्ट्सी बोर्ड ऑफ इंडिया) ने रेजॉलुशन प्लांस के बढ़ते आवेदन को देखते हुए यह कदम उठाया है।

मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘अब किसी दिवाला शोधन योजना की स्वीकृति से पहले आवेदक कंपनी समेत उसके प्रवर्तकों (प्रमोटर्स) को कड़ी जांच से गुजरना होगा।

उनका पहले का कार्य इतिहास तथा उनकी विश्वसनीयता जांचने के बाद ही आवेदन को स्वीकृत किया जाएगा।’ इस बयान से यह साफ हो गया है कि अब प्रमोटर्स भी इस योजना के तहत आवेदन दे सकते हैं।

बोर्ड की ओर से लागू किए जानेवाले इन्सॉल्वंस ऐंड बैंकरप्ट्सी कोड के तहत हर रेजॉलुशन प्लान को कर्जदाताओं की कमिटी से हरी झंडी मिलनी जरूरी है। रेजॉलुशन प्रोसेस को 180 दिनों के अंदर पूरा किया जाना होता है, हालांकि इसकी मियाद बढ़ाने का भी प्रावधान है।