केंद्र और राज्य सरकारों के बीच जीएसटी करदाताओं का विभाजन जल्द हो

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नई दिल्ली। सरकार ने जीएसटी के करदाताओं यानी व्यापारियों का केंद्र व राज्यों के बीच विभाजन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया है।

केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) की अध्यक्ष वनजा एन. सरना ने इस संबंध में देश भर में सभी जोन के मुख्य आयुक्तों को पत्र लिखकर कहा है कि यह काम जल्द निपटाया जाए ताकि व्यवसायियों को अपने क्षेत्रधिकारी के संबंध में स्पष्टता हो सके।

सूत्रों ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच जीएसटी के असेसीज का बंटवारा कंप्यूटर सिस्टम के माध्यम से किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर केंद्र और राज्यों के अधिकारी आपस में मिल-बैठकर भी यह तय कर रहे हैं कि करदाता किसके अधीन होने चाहिए। जीएसटी में करीब एक करोड़ कारोबारी पंजीकृत हैं।

सालाना 1.5 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले 90 प्रतिशत करदाताओं पर प्रशासनिक नियंत्रण राज्यों का होगा जबकि शेष 10 प्रतिशत पर केंद्र के अधीन आएंगे।

सालाना डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाले असेसीज में से केंद्र और राज्यों के पास 50:50 में होंगे। जीएसटी काउंसिल ने 20 सितंबर को एक आदेश जारी कर केंद्र और राज्यों के बीच असेसीज के बंटवारे की प्रक्रिया बतायी थी।

मेरठ जोन ने करदाताओं के विभाजन के लिए जरूरी आदेश जारी कर दिये है जबकि दूसरे जोन में भी यह प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यही वजह है कि सीबीईसी ने यह ताजा निर्देश आयुक्तों को भेजा है।

रिटर्न की समीक्षा कर सकती है सरकार
सरकार जीएसटी के हर महीने तीन रिटर्न दाखिल करने के प्रावधान की समीक्षा कर सकती है ताकि व्यापारियों के लिए नये टैक्स का अनुपालन आसान बनाया जा सके।

इस समय उन्हें जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3 हर महीने भरना होता है। इनमें व्यापारियों को खरीदारों और सप्लायरों की जानकारी देनी होती है ताकि करारोपण और इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान किया जा सके।

जुलाई के रिटर्न भरने में इन्वॉयस के मिलान में दिक्कतें आने की शिकायतों के बाद समीक्षा की संभावना है। एक अधिकारी ने बताया कि इस बात की समीक्षा हो सकती है कि इन्वॉयस का मिलान आवश्यक है या नहीं।