दिवाली पर जीएसटी पोर्टल की पूजा करेंगे व्यापारी

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नई दिल्ली। दिवाली के शुभ मुहूर्त में पारंपरिक बहीखाते की पूजा-अर्चना करने वाला व्यापारी समाज इस साल जीएसटी पोर्टल की पूजा करेगा।

तकनीकी बदलाव के साथ पिछले कुछ साल से व्यापारी दिवाली पूजा में कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य डिजिटल गैजेट्स को शामिल करते रहे हैं, लेकिन इस साल नई कर व्यवस्था जीएसटी ने न सिर्फ उनके व्यापार के तौर-तरीकों को बदला है, बल्कि कैशबुक, लेजर और अकाउंट बुक्स को ऑनलाइन पोर्टल पर ला दिया है।

जीएसटी लागू होने के बाद से व्यापारियों का सबसे ज्यादा सरोकार इस पोर्टल से ही रहा है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) गुरुवार को करोलबाग में दिवाली पूजा का आयोजन कर रहा है, जिसमें विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच जीएसटी पोर्टल की पूजा-अर्चना की जाएगी।

संगठन की देश भर में इकाइयां भी अपने स्तर पर पोर्टल की पूजा करेंगी। कैट के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने बताया, ‘आज किसी भी व्यापारी के लिए जीएसटी पोर्टल न सिर्फ बहीखाता बल्कि सभी तरह का डॉक्युमेंट और रेकॉर्ड बुक बन चुका है।

हम दिवाली पूजा के दौरान इसकी अराधना करेंगे और ईश्वर से कामना करेंगे कि व्यापारियों को पोर्टल पर टैक्स अनुपालन में तकनीकी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े।’  जीएसटी लागू होने के बाद से ही जीएसटी पोर्टल को लेकर व्यापारी कई तरह की दिक्कतों का सामना करते रहे हैं।

जुलाई महीने की रिटर्न फाइलिंग के दौरान पोर्टल कई बार स्लोडाउन का शिकार हुआ, जिसके चलते सरकार को कई बार रिटर्न की लास्ट डेट बढ़ानी पड़ी। उधर, सितंबर महीने की जीएसटीआर-3बी की फाइलिंग के दौरान अगस्त महीने की लेट फीस काटने का मुद्दा गर्माने लगा है।

टैक्स प्रफेशनल्स की ओर से शिकायतें आ रही हैं कि कभी पोर्टल लेट फीस नहीं ले रहा तो कभी पिछली लेट फीस भी जोड़ रहा है। मसलन, 13 अक्टूबर तक सितंबर महीने की फाइलिंग आराम से हो रही थी, लेकिन अब सितंबर का रिटर्न फाइल करते ही अगस्त महीने की लेट फीस प्रतिदिन 200 रुपये की दर से मांगी जा रही है।

चूंकि सितंबर रिटर्न की डेट 20 अक्टूबर है, लोगों को मौजूदा रिटर्न के साथ पिछले विलंब के लिए लेट फीस खटक रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है और इसे जीएसटीएन लेवल पर दुरुस्त किया जाना चाहिए। सबसे ज्यादा परेशान वे लोग हैं, जिनकी टैक्स देनदारी निल या सौ दो सौ रुपये है।