सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की अगली किश्त जारी

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नई दिल्ली । सरकार आज से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की अगली किश्त जारी कर रहा है। यह वर्ष 2017-18 की दूसरी किश्त है। वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में बताया है कि इन बॉन्ड्स की बिक्री बैंक, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल), अधिकृत पोस्ट ऑफिस और एनएसई व बीएसई के जरिए की जाएगी।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड फिजिकल गोल्ड में निवेश करने का एक विकल्प है। इस स्कीम को पिछले वर्ष नवंबर में लॉन्च किया गया था। रिजर्व बैंक सरकार की ओर से बॉन्ड जारी करता है। स्कीम का उदेश्य फिजिकल गोल्ड की मांग को कम करना और घरेलू बचत के लिए नए विकल्प की ओर लोगों का रुझान बदलना था, ताकि वे फाइनेंशियल सेविंग के लिए सोने की खरीद कर पाएं।

कैसे तय होगी बॉन्ड की कीमत:
भारत बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड की ओर से दी गई कीमत पर इस बॉन्ड की कीमत तय होगी। वहीं इस बॉन्ड की कीमत रुपए में तय की जाएगी।

कितनी सीमा तक खरीद पाएंगे बॉन्ड:
नियम के मुताबिक गोल्ड बॉन्ड में 8 साल के लिए निवेश करना जरूरी है, जिसे कम से कम 5 साल के लिए बनाए रहना होगा। कम से कम 1 ग्राम सोने और अधिकतम 500 ग्राम सोने के लिए बॉन्ड खरीदे जा सकते हैं। बॉन्ड खरीद के लिए पेमेंट अगर कैश से करनी है तो अधिकतम 20,000 रुपए कैश दे सकते हैं। वहीं इससे ऊपर की पेमेंट चेक या नेट बैंकिंग के जरिए करनी होगी। जानिए गोल्ड बॉन्ड में निवेश के क्या हैं फायदे:

गोल्ड बॉन्ड में मिलता है बेहतर रिटर्न:
गोल्ड बॉण्ड में निवेश करने पर अच्छा ब्याज मिलता है। इसमें ब्याज सहित सोने की कीमतों में आई तेजी के अनुसार रिटर्न भी मिलता है। इसमें निवेश करने से डीमैट और ईटीएफ जैसे कोई शुल्क नहीं लगाए जाते हैं। गोल्ड बॉण्ड की ब्याज दर 2.75 फीसदी है। इस पर मिलने वाला ब्याज सोने के मौजूदा भाव के हिसाब से तय किया जाता है।

इसमें निवेश के साथ बचत भी:
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गोल्ड बॉण्ड को डिजिटल फॉर्म में सुरक्षित रखा जा सकता है। वहीं दूसरी ओर इसे अपने घर या डीमेट एकाउंट में भी रखा जा सकता है। इससे तरह लॉकर पर होने वाला खर्च भी बच जाएगा।

धोखाधड़ी की नहीं है कोई चिंता:
गोल्ड बॉण्ड में किसी तरह की धोखाधड़ी और अशुद्धता की संभावना नहीं होती है। गोल्ड बॉण्ड में मिलने वाला सोना शत प्रतिशत शुद्ध सोने की ही वैल्यु देता है।

कैपिटल गेन टैक्स की भी हो सकती है बचत:
गोल्ड बॉण्ड की कीमतें सोने की कीमतों में अस्थिरता पर निर्भर करती है। सोने की कीमतों में गिरावट गोल्ड बॉण्ड पर नकारात्मक रिटर्न देता है।  अस्थिरता को कम करने के लिए सरकार लंबी अवधि वाले गोल्ड बॉण्ड जारी कर रही है।

इसमें निवेश की अवधि 8 वर्ष होती है, लेकिन आप 5 वर्ष के बाद भी अपने पैसे निकाल सकते हैं। पांच वर्ष के बाद पैसे निकालने पर कैपिटल गेन टैक्स भी नहीं लगाया जाता है।

गोल्ड बॉण्ड होती है सरकारी गारंटी:
गोल्ड बॉण्ड भारत सरकार की ओर से दी गई सॉवरन गारंटी होती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि यह हमेशा सकारात्मक रिटर्न्स ही देगा।

बढ़वा सकते हैं गोल्ड बॉण्ड की मैच्योरिटी:
गोल्ड बॉण्ड की अवधि मैच्योरिटी पीरियड के बाद तीन वर्ष के लिए और बढ़वाई जा सकती है। इसकी मदद से मैच्योरिटी के समय बाजार के नकारात्मक संकेतों से बचा जा सकता है।

गोल्ड बॉण्ड के एवज में मिल सकता है लोन:
जरूरत पड़ने पर गोल्ड बॉण्ड के एवज में बैंक से लोन भी लिया जा सकता है। गोल्ड बॉण्ड पेपर को लोन के लिए कोलैटर्ल के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पोस्ट ऑफिस की नैश्नल सेविंग सर्टिफिकेट के जैसा होता है।