जीएसटी चुकाने वाले ही पकड़ाएंगे टैक्स चोरी

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सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि कोई भी रजिस्टर्ड या माइग्रेटेड ट्रेडर बिना बिल के 200 रुपये से ज्यादा की टैक्सेबल सेल नहीं कर सकता, अगर ग्राहक ने बिल नहीं लिया तो भी उस सेल को अकाउंट बुक में दर्ज करना अनिवार्य है।

नई दिल्ली। जीएसटी लागू होने के बाद से बिल नहीं देने, फर्जी बिलिंग और बिल काटने के बाद भी टैक्स जमा नहीं कराने की बढ़ती शिकायतों पर राज्य सरकारें अलर्ट हो गई हैं। राज्य सरकारें अब टैक्स चुकाने वाले ग्राहकों को ही टैक्स चोरी पकड़ने का हथियार बनाने में जुटी हैं।

दिल्ली, यूपी, हरियाणा, गुजरात सहित कई राज्यों की सरकारें त्योहारी डिमांड के बीच ग्राहकों से अपने-अपने तरीके से टैक्स चोरी रोकने में मदद मांग रही हैं।

यूपी सरकार ने तो बाकायदा एक स्कीम पेश की है, जिसके तहत ग्राहकों से शॉपिंग बिल की कॉपी वॉट्सऐप या ईमेल करने को कहा गया है, जिसकी मैचिंग की जाएगी या फील्ड सर्वे से जांच की जाएगी।

यूपी के कमिश्नर (कमर्शल टैक्स) मुकेश मेश्राम की ओर से जारी आदेश में सभी जिलों में ऐसे बिलों की कॉपी मैच करने, असेस करने, ग्राहकों को सूचित करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है।

हरियाणा सरकार ने भी विज्ञापन के जरिए ग्राहकों से हर शॉपिंग पर बिल लेने और उसमें कुछ निश्चित डेटा चेक करने की अपील की है।

दिल्ली सरकार ने वैट रिजीम में ही इस तरह की धांधली रोकने के लिए ‘बिल बनावाओ, इनाम पाओ’ स्कीम चला रखी थी, जिससे बड़े पैमाने पर टैक्स चोरों को पकड़ने में मदद मिली थी।

अब अधिकारी सोशल मीडिया में शेयर हो रहे फर्जी और गलत बिलों को गंभीरता से ले रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि फेसबुक, वॉट्सऐप, ट्विटर पर शेयर हो रहे करीब 100 बिलों को संज्ञान में लिया गया है और उनका असेसमेंट चल रहा है।

उनमें से करीब एक दर्जन वास्तविक ग्राहकों का पता लगा लिया गया है। उनकी मदद से दोषी रेस्तरां, दुकानों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

अधिकारी ने बताया कि जरूरत पड़ी तो जीएसटी में भी इनामी स्कीम लाई जा सकती है। हालांकि, इसके लिए केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों की राय भी ली जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि बोगस बिलिंग की सबसे ज्यादा शिकायतें रेस्तरां और खानपान की दुकानों से आ रही हैं, जबकि बिल नहीं देने संबंधी शिकायतें मीडिया रिपोर्टों के आधार पर संज्ञान में ली गई हैं।

इन दिनों त्योहारी सीजन की सेल के बीच बहुत से ट्रेडर बिल नहीं दे रहे और उसके पीछे इस तरह की दलीलें दे रहे हैं कि अभी रेट नहीं पता या टिन नंबर नहीं मिला है।

हालांकि, सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि कोई भी रजिस्टर्ड या माइग्रेटेड ट्रेडर बिना बिल के 200 रुपये से ज्यादा की टैक्सेबल सेल नहीं कर सकता। अगर ग्राहक ने बिल नहीं लिया तो भी उस सेल को अकाउंट बुक में दर्ज करना अनिवार्य है।