सरकारी बैंकों ने 2.5 लाख करोड़ का कर्ज बट्टे खाते में डाला

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रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक बैंकों को कर रियायतों का लाभ पाने के लिए फंसे कर्जो की पर्याप्त धन राशि बट्टे खाते में डालनी होती है।

नई दिल्ली । पिछले पांच वित्त वर्षो के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के फंसे कर्ज (एनपीए) बट्टे खाते में डाल दिये यानी इन कर्जो की वसूली नामुमकिन मानकर उनके लिए धनराशि का प्रावधान किया। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के हवाले से वित्त मंत्रलय ने दी है।

भारतीय स्टेट बैंक और उसके पांच सहयोगी बैंकों समेत 27 सार्वजनिक बैंकों ने बीते वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान 81,683 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले। पिछले पांच साल में यह सर्वाधिक राशि है। इससे पिछले वित्त वर्ष में बट्टे खाते में डाली गई राशि के मुकाबले यह 41 फीसद ज्यादा है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया समूह ने इस दौरान 27,574 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले। मौजूदा वित्त वर्ष में पहले दिन यानी एक अप्रैल को सहयोगी बैंकों का एसबीआई  में विलय हो गया।

बैंकों द्वारा बट्टे खाते में डाली गई राशि के बारे में जारी रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक सार्वजनिक बैंकों ने वित्त वर्ष 2012-13 में 27,231 करोड़, 2013-14 में 34,409 करोड़, 2014-15 में 49,018 करोड़, 2015-16 में 56586 करोड़ और 2016-17 में 81,683 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले।

बीते वित्त वर्ष में पंजाब नेशनल बैंक ने 9205 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया ने 7346 करोड़ और केनरा बैंक ने 5545 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले। इसी तरह बैंक ऑफ बड़ौदा ने 4348 करोड़, कॉरपोरेशन बैंक ने 3574 करोड़, इंडियन ओवरसीज बैंक ने 3066 करोड़ और आइडीबीआई बैंक ने 2868 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले।

रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक बैंकों को कर रियायतों का लाभ पाने के लिए फंसे कर्जो के लिए पर्याप्त धन राशि बट्टे खाते में डालनी होती है। आरबीआई ने बैंकों को इसकी अनुमति दी है कि वे मुख्यालय स्तर पर किसी फंसे कर्ज के लिए राशि बट्टे खाते में डाल सकते हैं। साथ ही वे शाखा स्तर पर वसूली के लिए प्रयास जारी रख सकते हैं।

रिजर्व बैंक के अनुसार 31 मार्च 2017 को सार्वजनिक बैंकों का कुल एनपीए यानी फंसे कर्ज उनके कुल कर्जो के मुकाबले 12.47 फीसद थे। इन बैंकों के कुल कर्ज 51.42 लाख करोड़ रुपये थे जबकि उनके फंसे कर्ज 6.41 लाख करोड़ रुपये थे। बैंकों का एनपीए तेजी से बढ़ने से सरकार अत्यधिक चिंतित है।