GST : ई-वे बिल की लिमिट बढ़ाने का प्रस्ताव

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नई दिल्ली। गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) की व्यवस्था के तहत 50 हजार रुपये से ज्यादा का माल राज्यों के बीच लाने-ले जाने के लिए ई-वे बिल बनवाने का जो प्रस्ताव किया गया है, उसकी लिमिट बढ़ाई जा सकती है।

ऐसा व्यापारियों को परेशान करने की गुंजाइश घटाने और कथित इंस्पेक्टर राज की वापसी न होने देने के लिए किया जा सकता है। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि जीएसटी काउंसिल कारोबारी सहूलियत बढ़ाने के लिए कई प्रक्रियाओं को सरल भी बना सकती है।

एक अधिकारी ने बताया, ‘लिमिट बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।’ इस संबंध में एक प्रस्ताव पर जीएसटी काउंसिल 5 अगस्त की बैठक में विचार कर सकती है। जीएसटी से जुड़े मामलों में फैसला करने के लिए यह काउंसिल शीर्ष संस्था है।

ई-वे बिल पर आम सहमति बनाना इस लिहाज से अहम है कि जीएसटी का पूरा लक्ष्य हासिल करने के लिए यह मसला हल करना जरूरी है। इससे राज्यों के बीच माल के ट्रांसपोर्ट में आसानी होगी।

काउंसिल कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स रेट्स को बदलने पर भी चर्चा कर सकती है। पहली जुलाई को जीएसटी लागू होने के बाद दिए गए प्रतिवेदनों और मिले फीडबैक के आधार पर यह चर्चा की जा सकती है।

काउंसिल जीएसटी के टेक इंफ्रास्ट्रक्चर और रिटर्न फाइलिंग के सिस्टम का जायजा भी ले सकती है। देश के भीतर 50000 रुपये से ज्यादा के किसी आइटम के ट्रांसपोर्टेशन के लिए ई-वे बिल की जरूरत होगी।

इसे इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में एक तरह के परमिट के रूप में प्रस्तावित किया गया है, जिस पर ले जाए जाने वाले माल की डिटेल्स दर्ज होंगी। इस बात का डर जताया जा रहा है कि ई-वे बिल कारोबारियों को परेशान करने और करप्शन का जरिया बन सकता है और ऐसा होने पर जीएसटी का मकसद पूरा करने में बाधा पड़ेगी।

जीएसटी काउंसिल ने अभी ई-वे बिल के नियमों को मंजूरी नहीं दी है। राज्यों के बीच इस बात पर सहमति नहीं बन पाई है कि इस फ्रेमवर्क की जरूरत है या नहीं और अगर है तो इसकी प्रक्रिया क्या होगी।

काउंसिल ने राज्यों को छूट दी है कि जब तक नियमों को अंतिम रूप नहीं दे दिया जाता, तब तक वे मौजूदा फ्रेमवर्क लागू किए रहें। शुरुआत में केंद्र ने भी ई-वे बिल का विरोध किया था, लेकिन कुछ राज्यों की मांग के बाद उसने रुख बदल लिया।

जीएसटी नेटवर्क ई-वे बिल जेनरेट करेगा। ये बिल इस बात के आधार पर एक से 15 दिनों तक वैलिड रहेंगे कि माल कितनी दूरी तक ले जाना है। ड्राफ्ट रूल्स के अनुसार, एक दिन का परमिट 100 किलोमीटर तक के लिए होगा, जबकि 15 दिनों का परमिट 1000 किलोमीटर से ज्यादा के लिए होगा। अधिकारियों ने कहा कि इन नियमों में ढील देने की संभावना है।

टैक्स अफसरों को यह अधिकार है कि वे ई-वे बिल या ले जाए जा रहे सामान को वेरिफाई करने के लिए किसी भी गाड़ी की जांच कर सकते हैं। वे राज्य के भीतर ढोए जाने वाले या राज्य के बाहर ले जाए जाने वाले माल, दोनों सूरतों में ऐसी जांच कर सकेंगे।

जीएसटी ने राज्य और केंद्र स्तर के 17 करों और 23 उपकरों की जगह ली है। इसका मकसद बाजार के लिहाज से पूरे देश को एक इकाई में बदलना है। स्टेट कमर्शियल टैक्स चेक पोस्ट को जीएसटी लागू होने के बाद खत्म कर दिया गया है। इससे देशभर में माल की आवाजाही में सहूलियत बढ़ी है।

आरएफआईडी चिप्स और क्यूआर कोड्स के जरिए ट्रांसपोर्टेशन में सहूलियत बढ़ाने के प्रयास भी हो रहे हैं। लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री, खासतौर से कूरियर सर्विसेज ने प्रस्तावित ई-वे बिल सिस्टम को लेकर चिंता जताई है।