प्याज के दाम आठ महीने में शीर्ष स्तर पर पहुंचे

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मुंबई। त्योहारी मांग की वजह से घरेलू और वैश्विक बाजारों में स्टाकिस्टों से मांग बढऩे और पूरे देश की प्रमुख मंडियों में कम आवक की वजह से प्याज की कीमतें आठ महीने में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं।

राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास संघ (एनएचआरडीएफ) द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से पता चलता है कि महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में प्याज की कीमत मंगलवार को 8.70 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी जो 31 मई की 4.50 रुपये प्रति किलो के निचले स्तर से लगभग दोगुनी है।

प्याज कीमतों में इतनी तेजी 30 नवंबर 2016 के बाद से नहीं देखी गई थी। सामान्य रूप से, कृषिगत जिंसों की कीमतें हर साल इसी समय में बढ़ती हैं, क्योंकि इस समय में बारिश से आपूर्ति बाधित होती है और साथ ही दशहरा और दीवाली को ध्यान में रखकर स्टाकिस्टों से मांग में तेजी देखी जाती है। 
 
दो साल पहले प्याज की कीमतें थोक में 80 रुपये प्रति किलोग्राम और खुदरा बाजारों में 100 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई थीं जिससे सरकार को हस्तक्षेप करते हुए बफर बनाने के लिए 500 करोड़ रुपये के आवंटन के लिए बाध्य होना पड़ा था।

इसके परिणामस्वरूप, स्मॉल फार्मर्स एग्रीबिजनेस कंसोर्टियम (एसएफएसी) और नैशनल एग्रीकल्चरल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नेफेड) जैसी सरकारी एजेंसियों ने पिछले सीजन के दौरान संयुक्त रूप से लगभग 30,000 टन प्याज की खरीद की थी। 
 
पिंपलगांव एग्रीकल्चरल प्रोड्ïयूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) के निदेशक अतुल शाह ने कहा, ‘मध्य प्रदेश में पिछले साल का स्टॉक कम पड़ गया। इसलिए पश्चिम बंगाल, असम आदि जैसे पूर्वोत्तर राज्यों और बिहार तथा उत्तर प्रदेश समेत उत्तर-पूर्वी राज्यों समेत देशभर से महाराष्ट्र पर मांग का दबाव बढ़ा है।

दिल्ली और अन्य क्षेत्रों से मांग बनी हुई है जिसमें त्योहारी मांग की वजह से तेजी आई है।’ मांग के बढ़ते दबाव और आयात ऑर्डरों में तेजी के बीच प्याज की आपूर्ति कई प्रमुख उत्पादक इलाकों में बारिश की वजह से भी प्रभावित हुई है और मंडियों में कम प्याज पहुंच रहा है।

जून के शुरू में 2,917 टन की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद लासलगांव मंडी में प्याज की आवक 24 जुलाई को घटकर 1200 टन पर रह गई्र, हालांकि 25 जुलाई को यह बढ़कर 1400 टन पर पहुंच गई। इसके अलावा प्याज की आपूर्ति इस साल बडे स्टॉकिस्टों द्वारा कम भंडारण की वजह से भी प्रभावित हुई है।

कीमतों में गिरावट को देखते हुए स्टॉकिस्टों ने प्याज की कम जमाखोरी पर ध्यान दिया। साथ ही सरकार द्वारा कृषिगत जिंसों की कीमतों को नियंत्रित रखने के संबंध में बार बार दिए गए बयानों से भी प्याज की जमाखोरी पर अंकुश लगा है।

कृषि मंत्रालय ने अपने पहले अग्रिम अनुमान में भारत का प्याज उत्पादन 2016-17 के लिए 1.971 करोड़ टन पर बताया गया है जो पूर्ववर्ती वर्ष में दर्ज 2.093 करोड़ टन की तुलना में लगभग 6 फीसदी कम है।