लोगों का पैसा लौटाना बैंकों की जिम्मेदारी – आरबीआई ने कहा

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बैंक साइबर ठगी के शिकार पीड़ितों को एफआईआर दर्ज कराने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।

देहरादून। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने सख्त लहजे में कहा है कि साइबर ठगी के शिकार लोगों का पैसा लौटाना बैंकों की जिम्मेदारी है।

बैंक पीड़ितों को एफआईआर दर्ज कराने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। ऐसे मामलों में बैंकों को पीड़ितों की शिकायत अविलंब दर्ज करनी होगी। इसके अलावा पुलिस जांच में किसी भी तरह की सूचना उपलब्ध कराना बैंकों की जिम्मेदारी है।

एटीएम कार्ड की स्कीमिंग कर तमाम दूनवासियों के खातों से हुई निकासी के मामले में आरबीआई हरकत में आ गया है। मंगलवार को राजपुर रोड स्थित आरबीआई कार्यालय में बैंक के महाप्रबंधक सुब्रत दास ने सभी बैंकों के अधिकारियों संग बैठक की।

उन्होंने बैंकों को निर्देश दिए कि छह जुलाई को आरबीआइ की ओर से अवैध ई-ट्रांजेक्शन को लेकर जारी किए गए सर्कुलर के मुताबिक बैंक पीड़ितों को उनकी रकम लौटाने के लिए कार्रवाई करें।

पीड़ित खाताधारक की शिकायत सही पाए जाने पर नुकसान की भरपाई करने का जिम्मा बैंकों का है। साथ ही कहा कि जिन मामलों की जांच पुलिस कर रही है, उनमें किसी भी तरह की सूचना या कागजात की जरूरत पड़ती है तो बैंक उपलब्ध कराए।

एसएमएस, मेल, टोल फ्री नंबर पर दर्ज करा सकते हैं शिकायत
आरबीआई के महाप्रबंधक सुब्रत दास ने कहा कि ठगी के शिकार लोग संबंधित ब्रांच में जाकर या एसएमएस, मेल आईबीआर, टोल फ्री नंबर आदि के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पीड़ित तीन कार्य दिवसों में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।