कोटा-बूंदी शैली की पेंटिंग विदेशों में भी लोकप्रिय, टीना अंबानी खरीदार

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अंबानी की पसंद राग-रागिनी, बारहमासा के अलावा प्रकृति से जुड़ी मिनिएचर पेंटिंग मुख्य है।

कोटा। प्रकृति और कृति के रुप में दुनिया में अपनी खास पहचान रखने वाले हॉलैंड तक कोटा- बूंदी शैली की पेंटिंग पहुंच चुकी है। कोटा विज्ञान नगर निवासी मिनिएचर आर्टिस्ट शेख मोहम्मद लुकमान द्वारा बनाई पेंटिंग वहां के लोगों की पसंदीदा बनी हुई है।

इनमें मुख्य रूप से धार्मिक विषयों पर बनी सोने चांदी और स्टोन कलर की पेटिंग हैं। आर्टिस्ट लुकमान के हाथ से बनी पेंटिंग्स हॉलैंड निवासी फरीद मंगवा रहे हैं। इंडिया विजिट के दौरान स्वयं यहां आकर भी विभिन्न सब्जेक्ट की पेंटिंग्स बनवाते हैं।

यहीं, नहीं इनके द्वारा बनाई मिनिएचर पेंटिंग्स को टीना अंबानी भी इनके द्वारा बनी पेंटिंग्स को मंगवा रही हैं। सबसे बड़ी बात है कि अंबानी की पसंद राग-रागिनी, बारहमासा के अलावा प्रकृति से जुड़ी मिनिएचर पेंटिंग मुख्य है। पिछले दिनों टीना अंबानी ने इस शैली की पेंटिंग्स मंगवाई थी।

हिन्दी बारहमासा इनकी पसंदीदा पेंटिंग्स है। एक पेंटिंग में छह महीने तक लग जाते हैं। चांदी, सोने और स्टोन कलर का इस्तेमाल किया जाता है। हॉलैंड के अलावा इंग्लैंड, जर्मनी, आस्ट्रेलिया, जापान भी पेंटिंग्स जा चुकी है। यह गुर अपने पिता से विरासत में मिले हैं। पिता शेख मोहम्मद उस्मान भी रियासतकालीन चित्रकार रहे हैं।

कोटा-बूंदी शैली की पेंटिंग

संरक्षण की चुनौती
लुकमान बताते है कि अब इस शैली का संरक्षण करना मुश्किल है। पहले के मुकाबले अब स्थानीय डिमांड भी नहीं आती है। स्टोन कलर की रेट 20 हजार रुपए किलो तक पहुंच चुकी है। चित्र बनाने में उपयोग आने वाला रांगा तक नहीं मिल पाता है।

मार्केटिंग के लिए प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता है। सबसे बड़ी बात है कि सरकार के स्तर पर भी इस कला को संरक्षण नहीं मिल पा रहा है। जबकि पिछली बार तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे के कार्यकाल में एक साल तक युवाओं को निशुल्क ट्रेनिंग दिलवाई गई थी। लेकिन, ऐसी योजना शुरू नहीं हो सकी है।