रद्द नहीं की जा सकती NEET 2017 परीक्षा: सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नीट रद्द नहीं की जी सकती,  क्योकि इससे छह लाख से ज्यादा छात्र प्रभावित होंगे।

नई दिल्ली। विभिन्न भाषाओं के प्रश्नपत्रों में समान सवाल न पूछे जाने और पेपर लीक होने के आधार पर मेडिकल में प्रवेश की नीट परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे याचिकाकर्ता से शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नीट रद्द नहीं की जी सकती।

 क्योकि इससे छह लाख से ज्यादा छात्र प्रभावित होंगे, जिन्होंने परीक्षा पास कर एमबीबीएस और डेंटल पाठ्क्रमों में प्रवेश लिया है।

 कोर्ट ने इस मसले पर सीबीएसई से जवाब मांगा है और मामले पर 31 जुलाई को फिर सुनवाई होगी। ये बात न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने गैर सरकारी संगठन संकल्प चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कही।

याचिका में कहा गया है कि समान परीक्षा समान प्रश्नपत्र के सिद्धांत का पालन नीट में नहीं हुआ है। अलग अलग भाषाओं के प्रश्नपत्रों में अलग अलग सवाल पूछे गए हैं। इसलिए परीक्षा रद कर नये सिरे से कराई जाए। कोर्ट ने कहा कि इस समय ऐसा आदेश नहीं दिया जा सकता हालांकि याचिका में जो बातें उठाई गई हैं उन पर कोर्ट विचार करेगा।

कोर्ट इस पर सीबीएसई का जवाब जानना चाहेगा।इससे पहले याचिकाकर्ता के वकील का कहना था कि नियम के मुताबिक सभी भाषाओं के प्रश्नपत्रों में समान सवाल पूछे जाने चाहिए थे जबकि ऐसा नहीं हुआ।

दूसरी ओर से पेश एएसजी मनिंदर सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि हिन्दी अंग्रेजी के अलावा आठ प्रादेशिक भाषाओं में परीक्षा हुई थी और सभी प्रश्नपत्रों में समान स्तर के कठिन सवाल पूछे गये थे। उन्होंने कहा कि 1.48 लाख छात्रों ने प्रादेशिक भाषा में परीक्षा दी थी। पेपर लीक न हो इसके भी इंतजाम किये गये थे।