जीएसटी इम्पेक्ट : बैंक, बीमा और म्यूचुअल फंड में निवेश महंगा

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नई दिल्ली।बैंकिंग, इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड में किये जाने वाले निवेश पर जीएसटी टैक्स की दर 18 फीसद तय की गई है जो अभी तक 15 फीसद थी।जीएसटी लगाने के बाद इन सेवाओं पर टैक्स रेट ज्यादा होने से उपभोक्ता पर इसका भर पड़ेगा। 

बैंकिंग  ;जीएसटी लागू होने के बाद बैंकिंग लेनदेन मामूली तौर पर महंगा होगा। बैंकिंग सेवाएं मसलन क्रेडिट कार्ड पेमेंट, फंड ट्रांसफर, एटीएम ट्रांजैक्शन, कर्ज पर लगने वाली प्रोसेसिंग फीस पर अब 18 फीसद जीएसटी का भुगतान करना होगा। अभी तक इसके लिए लोगों को 14.5 फीसद सेवा कर और इसके साथ कृषि कल्याण सेस और स्वच्छ भारत सेस लगता था।

 बैंकों को मिलने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट से संतुलित किया जा सकेगा। जीएसटी के तहत बैंक अब इनपुट क्रेडिट लेने के हकदार होंगे। कई बैंकिंग सेवाएं मसलन सावधि जमा, बैंक खाता डिपॉजिट आदि जिन पर अभी कोई शुल्क नहीं है, जीएसटी में भी टैक्स से बाहर रखा गया है। नए बैंक खाता खोलने पर भी किसी तरह का जीएसटी लागू नहीं होगा क्योंकि अभी भी यह सेवा कर के दायरे में नहीं आता।

म्यूचुअल फंड : सभी फंड निवेशक से फंड प्रबंधन और डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन के नाम पर टोटल एक्पेंस रेश्यो वसूलते हैं। इसे म्यूचुअल फंड उद्योग में टीईआर के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में म्यूचुअल फंड्स में टीईआर 1.25 फीसद से लेकर 2.75 फीसद के बीच लगाया जाता है। लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यह इसमें चार से सात बेसिस प्वाइंट यानी 0.04 से 0.07 फीसद की वृद्धि हो जाएगी।

इससे निवेशक की निवेश लागत में मामूली बढ़ोतरी होगी। मसलन अगर अभी कोई निवेशक 1.51 फीसद टीईआर देता है तो जीएसटी लागू होने के बाद उसके लिए यह दर 1.55 फीसद हो जाएगी।

बीमा:  वर्तमान में बीमा प्रीमियम पर 15 फीसद सेवा कर मान्य है। लेकिन पहली जुलाई के बाद हेल्थ, टर्म और मोटर इंश्योरेंस की स्कीमों पर देय प्रीमियम पर टैक्स की दर 18 फीसद होगी। हालांकि कंपनियों को मिलने वाले टैक्स क्रेडिट की वजह से इसकी वास्तविक दर काफी कम रहने की उम्मीद है। हालांकि अलग-अलग बीमा स्कीमों के प्रीमियम पर टैक्स की वास्तविक दर अलग-अलग बैठेगी।

उदाहरण के तौर पर यूलिप स्कीमों में केवल प्रशासनिक शुल्क, फंड मैनेजमेंट शुल्क और मोर्टेलिटी प्रीमियम पर टैक्स लगेगा, पूरे प्रीमियम पर नहीं। इसलिए बीमा क्षेत्र पर वास्तविक प्रभाव जीएसटी का क्या होगा, नियम और स्लैब रेट अंतिम तौर पर तय हो जाने के बाद ही इसका पता चलेगा। लेकिन एंडोमेंट पॉलिसी के प्रीमियम पर टैक्स की दर मौजूदा 1.88 फीसद से बढ़कर 2.25 फीसद हो जाएगी।