सीए के सिलेबस में बदलाव, अब ओपन बुक कंसेप्ट

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कानपुर। राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलाव तथा उद्योगों की जरूरतें देख इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट आफ इंडिया (आइसीएआई)  छात्रों के पाठ्यक्रम में परिवर्तन कर रहा है।

छात्रों की रटने की प्रवृत्ति को दूर कर उनमें तार्किक क्षमता का विकास करने के लिए इस साल से ओपन बुक कंसेप्ट शुरू किया जा रहा है। बदलाव के तहत अब छात्रों को परीक्षा कक्ष में किताब ले जाने की भी सुविधा मिलेगी।

बीते सप्ताह इंस्टीट्यूट की सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल द्वारा जीएसटी पर दो दिवसीय सेमिनार में भी इंस्टीट्यूट के नेशनल वाइस प्रेसीडेंट नवीन एनडी गुप्ता ने पाठ्यक्रम में परिवर्तन का जिक्र किया था।

काउंसिल से जुड़े सदस्यों के अनुसार अब ऑब्जेक्टिव (वस्तुनिष्ठ) प्रश्नों के माध्यम से देखने की कोशिश की जाएगी कि आखिर छात्रों ने विषय को कितना समझा है।

अपने सामने किताब होने के बाद भी छात्र प्रश्न का उत्तर तभी ढूंढ पाएगा जब उसने अपने विषय को ठीक से समझा होगा। इंस्टीट्यूट प्रत्येक 10 साल में अपने पाठ्यक्रम में बदलाव करता है।

सीए एक्ट से बना इंस्टीट्यूट :

  • इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट आफ इंडिया का गठन संसद में पारित सीए एक्ट 1949 के आधार पर हुआ है। एक प्रकार से यह सरकार हिस्सा है।
  • समय-समय पर आर्थिक क्षेत्र में लागू होने वाली सरकार की नीतियों का सही क्रियान्वयन करना इंस्टीट्यूट की जिम्मेदारी है। नीतियों को बनाने में भी इंस्टीट्यूट की अहम भूमिका रहती है।
  • आइडीएस पर देश में 470 कार्यक्रम लोगों के पास छिपे हुए कालेधन को बाहर निकालने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित आय घोषणा योजना (आइडीएस) 2016 में इंस्टीट्यूट ने देश भर में 470 बड़े कार्यक्रम आयोजित कराए।
  • इनका सार्थक परिणाम निकला और लोगों ने कालेधन की घोषणा की। इंस्टीट्यूट के इस प्रयास की वित्त मंत्री ने भी सराहना की। नोटबंदी व प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में भी चार्टर्ड अकाउंटेंट की अग्रणी भूमिका रही।
  • अब जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) के रूप में देश की कर प्रणाली में सबसे बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इसके लिए भी सेमिनार के माध्यम से इंस्टीट्यूट लोगों को अपग्रेड कर रहा है।