तो इसलिए नहीं मिल पाते आपको ट्रेन के कन्फर्म टिकट

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मुंबई। सॉफ्टवेयर की मदद से टिकटों की बुकिंग करने वालों पर नकेल कसने के लिए कुछ समय पहले आईआरसीटीसी सर्वर अपग्रेड किए थे। आईआरसीटीसी द्वारा दावा किया गया था कि नए सर्वर को हैक करना आसान नहीं होगा, लेकिन हाल ही में मध्य रेलवे द्वारा की गई कार्रवाई ने इन दावों को झूठा साबित कर दिया।

मध्य रेलवे आरपीएफ ने पिछले दिनों ‘काउंटर वी2’नाम के सॉफ्टवेयर के सर्वर को अपने शिकंजे में लिया है। जांच में पता चला है कि दलाल विदेशी आईपी अड्रेस के जरिए इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे थे। जांच दल के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका और जिम्बाब्वे के आईपी अड्रेस ट्रैस किए गए हैं। यही कारण है कि आम यात्रियों आसानी से ट्रेन के टिकट नहीं मिल पाते हैं।

100 रुपये में 60 ट‍िकट!
विदेशी आईपी अड्रेस के प्रॉक्सी (कॉपी) का इस्तेमाल करना आसान है। इस काम में बमुश्किल 100 रुपये खर्च होते हैं। इतने ही पैसे खर्च कर दलाल महीने भर में एक प्रॉक्सी विदेशी आईपी अड्रेस से 60 टिकट जनरेट करते थे। काउंटर सॉफ्टवेयर के जरिए एक ही वक्त कंप्यूटर पर कई विंडो खुल जाती थीं।

बुकिंग से पहले सभी विंडो पर डेटा फीड कर दिया जाता है। यह सॉफ्टवेयर आईआरसीटीसी द्वारा मांगे जाने वाले कैप्चा और ओटीपी को बाई-पास कर देता है। जहां साधारण व्यक्ति को इस प्रक्रिया में एक से डेढ़ मिनट लग जाते हैं, वहीं सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने वाले 5 सेकंड में काम कर लेते हैं।

‘काउंटर’ का ‘एनकाउंटर’
मध्य रेलवे आरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमनें ‘काउंटर वी2’ सॉफ्टवेयर का जो सर्वर पकड़ा है, उसमें 6,600 पीएनआर हैं। सभी पीएनआर का विश्लेषण करना इतना आसान नहीं। अधिकारी ने बताया कि मुंबई सहित देश के अन्य राज्यों में बैठे टिकट दलाल आईपी अड्रेस बनाकर पीएनआर जनरेट करते थे।

सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट विक्की शाह ने बताया कि यदि आईआरसीटीसी अपने सर्वर में कुछ परिवर्तन करे और सॉफ्टवेयर की कोडिंग में समय-समय पर कुछ परिवर्तन करती रहे, तो इस तरह के अपराध को रोका जा सकता है।

चाहिए मजबूत कानून
मध्य रेलवे ने अपनी कार्रवाई में सलमान खान नाम के आरोपी को पकड़ा है, जिस पर रेलवे ऐक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सलमान इससे पहले भी ऐसे ही अपराध में पकड़ा गया है, लेकिन कमजोर कानून के कारण छूट गया।

मध्य रेलवे आरपीएफ के विभागीय रेल मंडल सुरक्षा आयुक्त सचिन भालोदे ने बताया कि इस तरह के अपराध में 3 साल तक की जेल हो सकती है, लेकिन अधिकतम जेल बहुत ही कम केस में होती है। इस बार की कार्रवाई में करीब 1.5 करोड़ रुपये की टिकट की जालसाजी हुई है, इसलिए आरपीएफ को विश्वास है कि आरोपी को कड़ी सजा मिलेगी।