जमीन मांगी तो वन विभाग ने दिया मंडी समिति को कब्जे का नोटिस

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कोटा। भामाशाह मंडी के विस्तार के लिए कृषि उपजमंडी समिति की ओर से वन विभाग से 74 हैक्टेयर जमीन की डिमांड की गई थी। लेकिन, वन विभाग ने उलटा उन्हें 22 हैक्टेयर जमीन पर कब्जे का नोटिस थमा दिया। यह नोटिस 91 एलआरए एक्ट के तहत जारी किया गया है। जिसमें जमीन से बेदखली का भी मामला बनता है।

अब इसकी सुनवाई होगी। मंडी समिति ने इस नोटिस का जवाब देने के लिए वकील तय कर लिया है। भामाशाह कृषि उपजमंडी समिति की ओर से वन विभाग को 74 हैक्टेयर जमीन के डायवर्जन के लिए एक प्रस्ताव भेजा गया। वन विभाग ने जब इसकी जांच करवाई तो पता चला कि वन विभाग की 22 हैक्टेयर जमीन पर पहले ही मंडी समिति अवैध तरीके से काबिज है।

वन विभाग की ओर से मंडी समिति को पत्र भेजा कि पहले वह उनके कब्जे में मौजूद 22 हैक्टेयर जमीन का डायवर्जन करवाए। यह जमीन अवैध तरीके से उनके कब्जे में हैं। इसके बाद मंडी की ओर से उस जमीन को जोड़ते हुए 96 हैक्टेयर जमीन का डायवर्जन करने के लिए प्रस्ताव वन विभाग को भेजा गया है।

22 हैक्टेयर जमीन पर बिना पैसे दिए कर लिया कब्जा :विभाग के एसीएफ जयसिंह ने बताया कि पूर्व में वन विभाग की जमीन रीको को दी गई थी, रीकाे ने इसमें से मंडी समिति को मंडी विकसित करने के लिए जमीन दे दी। इसमें मंडी बनी तो 22 बीघा उस जमीन को भी अपने कब्जे में लिया , जिसका आवंटन उन्हें नहीं किया गया था।

इस जमीन पर मंडी ने निर्माण भी करवा लिया। जब मंडी समिति से पूछा तो उनकी ओर से बताया कि यह जमीन उन्हें रीकाे ने दी है। जिसके बदले में मंडी समिति की ओर से पैसा दिया गया है। वन विभाग ने उन्हें पैसे मिलने से इंकार करते हुए 91 एलआरए में नोटिस जारी कर दिया।  अब इसकी सुनवाई उनके यहां चल रही है। मंडी सचिव आरपी कुमावत ने माना कि वन विभाग की ओर से नोटिस मिल गया है। इसका जवाब दिया जा रहा है।