तीन दिन बाद लागू हो जाएगा ई-वे बिल, ट्रांसपोर्टर्स ने समझी व्यवस्था

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कोटा। सरकार ने ई-वे बिल को लागू करने के लिए नोटिफाई कर दिया है। 1 अप्रैल से ई-वे बिल पूरे देश में लागू हो जाएगा। इस संदर्भ में कंपनी एसोसिएशन एवं वाणिज्यिक कर विभाग कोटा की ओर से एक संयुक्त कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों ने ई-वे बिल में हुए नए संशोधन एवं अपनी समस्याओं को बताया। 

अतिरिक्त आयुक्त एनपी गुप्ता ने ट्रांसपोटर्स को बताया कि जीएसटी की 26वीं बैठक के बाद 1 अप्रैल से ई-वे बिल पूरे देश में लागू होगा। एक राज्य से दूसरे राज्य में कर योग्य 50 हजार रुपए से अधिक का सामान ले जाने के लिए ई-वे बिल जरूरी होगा। ई-वे बिल इंटर स्टेट और इंट्रा स्टेट कैटेगरी के लिए जारी किया जाएगा। इसके अलावा केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने जीएसटीआर 3बी रिटर्न दायर करने के लिए जून तक का समय दिया है।

अनुपम शर्मा ने बताया कि जीएसटी एक्ट के तहत कर योग्य 50 हजार और इससे अधिक मूल्य के माल परिवहन के लिए ई-वे बिल लगेगा। यह व्यवस्था 1 अप्रैल से इंटरस्टेट माल परिवहन के लिए लागू होगी। इसके पहले इस बिल में काफी बदलाव किया गया है। नए नियम सरल कर दिए गए हैं।

इससे व्यापारियों को माल परिवहन में बड़ी राहत मिलेगी। सबसे बड़ी राहत ई-वे बिल की वैधता को लेकर दी गई है, जिसमें अब 24 घंटे की जगह ई-वे बिल 72 घंटे तक वैध रहेगा। पहले प्रावधान था कि यदि माल 10 किमी दूर भेजा जा रहा है तो संबंधित को बिल के पार्ट ए और पार्ट बी के तहत वाहन की जानकारी देना जरूरी था, लेकिन अब इसमें राहत दे दी गई है।

अब इस दायरे को बढ़ाकर 50 किमी कर दिया गया है, यानी अब यदि किसी दुकान गोदाम से माल निकला है और इसकी कीमत 50 हजार से ज्यादा है तो ई-वे बिल तो लगेगा, लेकिन इसमें केवल पार्ट ए भरना होगा। पार्ट बी के तहत माल परिवहन करने वाले वाहन की जानकारी जरूरी नहीं रहेगी। एक राज्य से दूसरे राज्य में कर योग्य 50 हजार रुपए से अधिक का सामान ले जाने के लिए ई-वे बिल जरूरी

हैल्प डेस्क पर होगा समस्याओं का समाधान
ऑटो ट्रांसपोर्ट के ई-वे बिल जनरेट होने के प्रश्न पर अनुपम शर्मा ने बताया कि जिस समय व्हीकल नंबर बिल में लिखा जाएगा उस दिन रात 12 बजे से ई-वे बिल की अवधि प्रारंभ होगी। हाऊस हॉल गुड्स को ई-वे बिल से मुक्त कर दिया गया है।

हैल्प डेस्क अधिकारी उमंग नंदवाना ने बताया कि ई-वे बिल को 24 घंटे में कैंसिल किया जा सकता है एवं 72 घंटों या इसके वैलेडिटी जो पहले हो उसमें रिजेक्ट किया जा सकता है। इसमें सचिव चंद्रशेखर रामचंदानी, महामंत्री निगम शर्मा, संजय शर्मा,  आनंदी छाबड़ा, महावीर बाहेती, राधेश्याम पारीक शामिल थे।