ज्यादा क्रेडिट क्लेम पर रीयल्टी डिवेलपर्स को नोटिस

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मुंबई। करीब 400 रियल एस्टेट डिवेलपर्स को इनडायरेक्ट टैक्स डिपार्टमेंट ने नोटिस भेजे हैं। नोटिस पाने वालों में लिस्टेड कंपनियां भी शामिल हैं। मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने बताया कि ये नोटिस गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के तहत क्रेडिट क्लेम बढ़ाचढ़ाकर पेश करने के लिए दिए गए हैं।

नोटिसों में इन डिवेलपर्स से 100 पर्सेंट फाइन और गलत ढंग से क्लेम किए गए क्रेडिट पर करीब 18 पर्सेंट ब्याज चुकाने को कहा गया है। टैक्स अधिकारियों ने बताया कि कमर्शियल प्रॉपर्टी और रिटेल मॉल्स सेगमेंट में अच्छी मौजूदगी वाले कई डिवेलपर्स को भी ये नोटिस दिए गए हैं।

एक टैक्स ऑफिशियल ने बताया, ‘कुछ लिस्टेड कंपनियों सहित मुंबई के करीब 20 डिवेलपर्स ने ऐसे कच्चे माल के लिए इनपुट क्रेडिट क्लेम्स दाखिल किए हैं, जिसका इस्तेमाल जीएसटी लागू होने से पहले किया जा चुका था। इन कंपनियों को अब तगड़ा जुर्माना चुकाना होगा।’

अधिकारियों ने बताया कि आगे की जीएसटी देनदारी ऑफसेट करने के लिए इन कंपनियों ने स्टील, सीमेंट और बालू जैसे इनपुट्स की कॉस्ट पर क्रेडिट क्लेम किया था। हालांकि इनडायरेक्ट टैक्स डिपार्टमेंट का दावा है कि कुछ डिवेलपर्स ने ऐसे मामलों में भी क्रेडिट क्लेम किया है, जिनमें बिल्डिंग्स पहली जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने से पहले पूरी की जा चुकी थीं।

मामले की जानकारी रखने वाले एक अन्य व्यक्ति ने बताया, ‘एक डिवेलपर ने पहली जुलाई 2017 तक एक बिल्डिंग के दस फ्लोर बना लिए थे, लेकिन क्रेडिट क्लेम करते वक्त उसने दावा किया कि केवल दो फ्लोर तब तक पूरे हुए थे। उसने आठ फ्लोर के लिए अतिरिक्त क्रेडिट ले लिया।’ इस मामले में टैक्स डिपार्टमेंट ने 100 करोड़ रुपये के क्रेडिट की इजाजत नहीं दी और इतनी ही रकम के जुर्माने की मांग की है।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने कहा कि टैक्स क्रेडिट्स लेने के नियम काफी पारदर्शी हैं। रियल एस्टेट डिवेलपर्स के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट्स के योग्य होने की बात इस पर निर्भर करती है कि अपार्टमेंट्स को ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट्स मिलने के पहले बेचा गया था या नहीं और किसी प्रोजेक्ट में काम पहली जुलाई के पहले पूरा हुआ था या बाद में।

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर एम एस मणि ने कहा, ‘वैध इनपुट टैक्स क्रेडिट की गणना सटीक ढंग से करना महत्वपूर्ण है। अगर ऐसा हो तो बाद में इन्हें खारिज नहीं किया जाएगा। खारिज होने पर यह प्रोजेक्ट की लागत में जुड़ जाएगा और भविष्य में इसे बायर्स से रिकवर नहीं किया जा सकेगा।’

अधिकतर बड़े डिवेलपर्स के मामले में 25 से 100 करोड़ रुपये तक का क्रेडिट खारिज किया गया है। छोटी कंपनियों के मामले में आंकड़ा एक लाख से 5 करोड़ रुपये के बीच है। 400 डिवेलपर्स में से करीब 20 बड़ी कंपनियां मुंबई, एनसीआर, बेंगलुरु और हैदराबाद की हैं।

टैक्स अधिकारियों के अनुसार, रुनवाल डिवेलपर्स, यूनिटेक और इंडियाबुल्स रियल एस्टेट को भी नोटिस भेजे गए हैं। इन कंपनियों को 22 मार्च को भेजी गई ईमेल्स का जवाब नहीं मिला। इंडियाबुल्स के एक प्रवक्ता ने ईटी से फोन पर कहा कि उन्हें ऐसे किसी नोटिस की जानकारी नहीं है। ओबरॉय रियल्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।’