चम्बल शुद्धिकरण योजना ठण्डे बस्ते में डालने पर रोष

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कोटा। राष्ट्रीय जल बिरादरी की चम्बल संसद के शिष्टमण्डल ने गुरूवार को नगर विकास न्यास अध्यक्ष राम कुमार मेहता एवं सचिव आनंदी लाल वैष्णव से भेंट कर चम्बल शुद्धिकरण की योजना को ठण्डे बस्ते में डालने पर रोष जताया ।

चम्बल संसद के सभापति जीडी पटेल,जल बिरादरी के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश विजयवर्गीय,डॉ. सुसेन राज के अलावा गजेंद्र भार्गव, प्रीत कुमार नरेश शर्मा एवं पवन माहेश्वरी आदि ने न्यास प्रशासन के सामने रोष जताया। न्यास अध्यक्ष आरके मेहता ने बताया कि पुरानी कंपनियों के खिलाफ उनकी जमा राशि जप्त कर कार्रवाई की जारी है।

उनके कारण विलम्ब हुआ लेकिन मैं रोजाना मॉनीटरिंग कर रहा हूं। सचिव अनंदी लाल वैष्णव ने बताया कि नया टेंडर लगभग 250 करोड़ का है उसमें केंद्र ने 20 करोड़ा की राशि यूआईटी को दी है।

आरयूडीआईपी एवं राज्य सरकार को भी अपना हिस्सा देना था। अब लगभग 15 दिन में टेंडर प्रकिया पूरी हो जाएगी। सचिव ने प्रतिनधि मण्डल के साथ गंदे नालों को साफ करने की तकनीक पर भी चर्चा की।

बॉयोफिल्टरेशन प्लाण्ट को रोका जाए
जल बिरादरी की सदस्य एवं कोटा एनवायरमेंटल सेनीटेशन सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. सुसेन राज ने कहा कि नगर निगम कंसुआ नाले में बॉयो फिल्टरेशन संयंत्र लगा कर नाले को साफ करने का गलत टेंडर निकाल रहा है जो कि साजीदेहड़ा के ट्रीटमेंट प्लाण्ट की तरह से फेल होगा।

उसे रोकने के जिला कलेक्टर से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है। डॉ. राज ने बताया कि नगर निगम बिना विचारे गलत टेंडर करता है। फिर फेल होने वा हाथ खडे़ कर देता है, जैसा कि वेस्ट टू एनर्जी के टेंडर में हुआ। डॉ. सुसेन राज ने ज्ञापन में कहा कि सरकारी उदासीनता से चम्बल नदी के अस्तित्व पर संकट के बादल मण्डरा रहे है।

नगर विकास न्यास को सौंपा गया काम मजबूत इच्छा शक्ति के अभाव में ट्रीटमेट प्लांट सफेद हाथी बन कर खड़ें हैं। केंद्र सरकार की सहायता से चलने वाली योजनाओं को ठण्डे बस्ते में डालने से कई सवाल खड़े होते हैं। नगर निगम की कार्यप्रणाली पर जल बिरादरी ने कड़ी आपत्ति जताई।