तकनीकी शिक्षा की हालत सुधारने के लिये 35 करोड़ होंगे खर्च

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कोटा। तकनीकी शिक्षा की हालत सुधारने के लिए राजस्थान में 35 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। प्रदेश के प्राइवेट कॉलेजों को टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम से जोड़कर इनमें ट्रेंड फैकल्टी का इंतजाम करने, पाठ्यक्रम अपडेट करने, इंटरनेशनल वर्कशॉप और सेमिनार आयोजित करने के साथ-साथ छात्रों को इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग देने के लिए यह राशि खर्च की जाएगी।

मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की राष्ट्रीय परियोजना कार्यान्वयन इकाई (एनपीआईयू) ने इस काम के लिए 35 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। जिसे कॉलेज कैंपस का इन्फ्रास्ट्रेक्चर, टीचिंग, ट्रेनिंग और प्लेसमेंट की गुणवत्ता सुधारने पर खर्च किया जाएगा।

एनपीआईयू ने पूरे कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर क्रियानवित कराने और उसकी निगरानी करने की जिम्मेदारी क्वालिटी एजुकेशन के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर धाक जमा चुके दो विश्वविद्यालयों को सौंपी है।

नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में पहला स्थान हासिल करने वाले कोलकता के जादवपुर विश्वविद्यालय को यूनिवर्सिटी कॉलेज के कैंपस इंप्रूवमेंट प्रोग्राम का जिम्मा सौंपा है। वहीं देश का पहला तकनीकी विश्वविद्यालय जेएनटीयू हैदराबाद निजी कॉलेजों की हालत सुधारने में आरटीयू की मदद करेगा।

ये होंगे काम : प्रोग्राम कॉर्डिनेटर प्रो. धीरेंद्र माथुर ने बताया कि योजना के तहत निजी कॉलेजों के व्याख्याताओं को शैक्षणिक गुणवत्ता निखारने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। आरटीयू कैंपस में रिसर्च हब बनाया जाएगा। डिग्री हासिल करने के बाद छात्रों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम और गेट एग्जाम की प्रेक्टिस क्लास भी शुरू की जाएंगी। नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडेशन (एनबीए) से कॉलेजों का मूल्यांकन भी करवाया जाएगा।

आरटीयू को सौंपी जिम्मेदारी
एनपीआईयू ने योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) को सौंपी है। बजट में से 20 करोड़ रुपए निजी कॉलेजों की हालत सुधारने के लिए खर्च किए जाएंगे। 15 करोड़ रुपए विश्वविद्यालय परिसर स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज के अपग्रेडेशन पर खर्च होंगे।