मोबाइल तस्वीरों,को सबूत माना जायेगा, साक्ष्य अधिनियम में होगा संशोधन

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लखनऊ। मोबाइल फोन से क्लिक की गईं तस्वीरों और विडियो को प्राथमिक सबूत के रूप में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार साक्ष्य अधिनियम 1872 में संशोधन की योजना बना रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अलग-अलग राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और जम्मू कश्मीर के पुलिस विभाग की राय जानने के बाद यह योजना बनाई है।

दरअसल रोहतक में जाट आंदोलन और यूपी के सहारनपुर दलित विरोधी हिंसा में सिक्यॉरिटी फोर्स को स्थिति संभालने में अयोग्य बताकर जमकर आलोचना हुई थी। केंद्र के कानून संशोधन के प्रस्ताव के अनुसार, साक्ष्य अधिनियम 1872 के अंतर्गत विडियो रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी फुटेज या मोबाइल फोन से क्लिक की गई तस्वीरों को अभियोजन के लिए उपयुक्त साक्ष्य के रूप में माना जाना चाहिए।

विरोध-प्रदर्शन करने पर संगठनों से हर्जाना
इसके लिए आवश्यक संशोधन सीआरपीसी या ऐक्ट में शामिल किए जा सकते हैं। इसी के साथ केंद्र को शांति बनाए रखने के लिए विरोध-प्रदर्शन के आयोजकों से क्षतिपूर्ति की रकम की मांग करनी जाहिए। वहीं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 इलेक्ट्रॉनिक रेकॉर्ड्स को साध्य अधिनियम के तहत कानूनी मान्यता दे चुका है।

इसमें ई-मेल, तस्वीरों, एसएमएस के रूप में सबूतों को एक सर्टिफिकेट के साथ ऐक्ट की धारा 65 बी के अंतर्गत लाया जा सकता है। साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 कोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक रेकॉर्ड के सबूत की शर्तों और प्रक्रिया को निर्धारित करती है।

इसमें इलेक्ट्रॉनिक रेकॉर्ड को स्वीकार्य बनाने के लिए दो शर्तें रखी गई हैं- पहला डेटा में कोई अनधिकृत पहुंच नहीं होनी चाहिए और दूसरा कम्प्यूटर की फंक्शनिंग सही होनी चाहिए तभी डेटा को सटीक और वास्तविक माना जाएगा।

हिंसा भड़काने वाले को पकड़ना आसान
क्रिमिनल लॉयर तनवीर मीर ने बताया, ‘अभी तक हर केस में जहां मोबाइल फोन के इलेक्ट्रॉनिक डेटा का संबंध होता था, उसके लिए पहले डेटा को कंप्यूटर पर कॉपी किया जाता था और फिर उसका प्रिंटआउट निकाला जाता था।

सर्टिफिकेट में कम्प्यूटर फरेंसिक एक्सपर्ट, मोबाइल फोन और लैपटॉप के ऑपरेटर द्वारा बताई गई ट्रांसफर और प्रिंटिंग की पूरी प्रक्रिया लिखी होती है। इसे साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 बी में शर्तों के अनुरूप होना अनिवार्य है।’ यूपी पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘सार्वजनिक स्थानों में हिंसा को भड़काने वाले आरोपी को पकड़ने के लिए यह संशोधन कारगर होगा।’