गोबर की खाद से भी फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी

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कोटा। गोबर के खाद से भी फसलों का उत्पादन कम नहीं होता,किसानों को चाहिए कि उन्हें रासायनिक खादों का इस्तेमाल छोड़ना होगा। इसके लिए जैविक खेती से उत्पादों की मण्डी विकसित करने की जरूरत है।

उक्त बात राम कृष्ण शिक्षण संस्थान भदाना, कट्स इंटरनेशनल तथा स्वीडिश सोसायटी फॉर नेचर कंजर्वेशन द्वारा आयोजित ग्राम स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम में वक्ताओं ने कही।

सांसद आदर्श ग्राम कैथून क्षैत्र के ग्राम ढोटी के अलावा खजूरी एवं अरण्डखेड़ा में कट्स इंटरनेशल के परियोजना अधिकारी राजदीप पारीक ने कहा कि रासायनिक खादों के स्थान पर गोबर और केंचुआ खाद का इस्तेमाल करें।

इससे प्रारम्भ में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन जैविक खाद से पैदा हुई फसल और सब्जियों की कीमतें अच्छी मिलतीं है तथा धरती व इंसान के स्वास्थ्य के लिए श्रेष्ठ है।

कर्यक्रम के संयोजक एवं नगर निगम के पार्षद युधिष्ठिर चानसी ने बताया कि गांवों में गोबर की रेवड़ियों को कचरा पाइंट ने बनने दें।

गड्ढा खोद कर उसे वर्मी कम्पोस्ट में बदलेंगे तो वह शानदार खाद तैयार होगा। जल बिरादरी के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश विजयवर्गीय ने कहा कि गौ मूत्र से तैयार कीटनाशकों का इस्तेमाल कर केमिकल पेस्टीसाईट्स का इस्तेमाल बंद करें।

ग्राम खजूरी में संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रगतिशील कृषक ठाकुर रतन सिंह ने सुझाव दिया कि जैविक खेती को प्रोत्साहन के लिए उससे उत्पन्न अनाजों की मण्डी अलग से रखी जाए। किसानों को अच्छे दाम मिलेंगे तो स्वतः ही जैविक खेती की ओर अग्रसर होंगे।

सिंह ने बताया कि घर में खाने के लिए तो हम अनाज जैविक खेती से ही पैदा कर रहे हैं। कार्यक्रम में जल धारा के समन्वयक रहे हरि राम तथा खूबचंद भारती व किसानों ने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर स्वदेशी आंदोलन के आधुनिक प्रेरक स्वर्गीय राजीव दीक्षित का भाषण तथा सत्यमेव जयते टीवी कार्यक्रम का ऑडियो, वीडियो ग्रामीणों को दिखाया गया ।