ई-वे बिल के ट्रॉयल के लिए तैयार नही ट्रेडर्स, कल इमरजेंसी मीटिंग

0
25

नई दिल्ली। जीएसटी रिटर्न फाइलिंग के बाद अब ई-वे बिल सरकार के लिए नया सिरदर्द बन सकता है। कारोबारी और ट्रेडर्स 15 जनवरी से ई-वे बिल के शुरू होने वाले ट्रायल के लिए तैयार नहीं है। उनके अनुसार जीएसटी में जिस तरह अभी तक टेक्निकल इश्यू रहे हैं, ऐसे में सरकार को ई-वे बिल को टाल देना चाहिए। इसे फरवरी की जगह अप्रैल तक टाल देना चाहिए। सरकार को पूरी तैयारी के बाद ट्रायल शुरू करना चाहिए।

 15 जनवरी से शुरू होगा ट्रायल
 1 फरवरी से ई-वे बिल लागू होना है। ई-वे बिल ट्रांसपोर्टेशन के आधार पर दो तरह से लागू होगा। इंटर स्टेट ई-वे बिल के लिए काउंसिल ने 1 फरवरी 2018 की डेडलाइन तय की है जबकि इंट्रा स्टेट ई-वे बिल के लिए 1 जून 2018 से लागू करने का फैसला किया गया है।

डेडलाइन से पहले ई-वे बिल का ट्रायल करने की डेडलाइन तय की गई है जो 15 जनवरी से शुरू होगा। ई-वे बिल लागू होने से सरकार के लिए टैक्स चोरी पर लगाम लगाना आसान हो जाएगा।
 
 कारोबारियों को है डर
 कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि ट्रेडर्स को इस बात का भी डर है कि अभी भी जैसे वह रिटर्न फाइल करने में अभी भी स्ट्रगल कर रहे हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्टेशन के समय जब मंथली रिटर्न की जगह रोज करोड़ों की संख्या में ई-वे बिल ही जनरेट होगा, तो क्या सिस्टम सही काम करेगा?
 
9 जनवरी को ट्रेडर्स एसोसिएशन ने बुलाई मीटिंग
 मेटल एंड स्टेनलेस स्टील मर्चेंट एसोसिएशन (एमएसएमए) के प्रेसिडेंट जितेंद्र शाह ने कहा कि देश भर की सभी ट्रेडर्स एसोसिएशन जीएसटी से जुड़ी सभी परेशानियों को लेकर 9 जनवरी को मीटिंग कर रही हैं।

इस मीटिंग में ई-वे बिल नए फाइनेंशियल ईयर से लागू करने, लिमिट बढ़ाई जाने, जीएसटी पोर्टल पर आ रही फाइलिंग की दिक्कतों, एपीएमसी सेस हटाने, ब्रांडेड फूड ग्रेन पर जीएसटी हटाने को लेकर सरकार पर कैसे दबाव बनाया जाए आदि पर विचार किया जा रहा है।
 
कारोबारी कर सकते हैं स्ट्राइक
 सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी ताराचंद गुप्ता ने कहा कि ट्रेडर्स को इस बात का भी डर है कि अभी भी जीएसटी पोर्टल रिटर्न फाइल और रिफंड करने में जूझ रहा हैं। अगर ऐसे में ट्रांसपोर्टेशन के समय अगर ई-वे बिल जेनरेट करने में समस्या आती है, तो इसका सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन और प्रोडक्ट की कीमतों पर पड़ेगा।

जितेंद्र शाह ने कहा कि ट्रेडर्स और कारोबारी बड़े स्तर इस मुद्दे को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। अगर सरकार कारोबारियों की बात नहीं मानती तो वह हड़ताल भी कर सकते हैं।
 
बढ़ाई जाए ई-वे बिल की लिमिट
 कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि ई-वे बिल में 50,000 रुपए की लिमिट बहुत कम है, जिसे सरकार को बढ़ाकर तीन लाख रुपए करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि ट्रेडर के कम क्वांटिटी के सामान की कीमत भी 1 से 10 लाख रुपए के बीच आराम से हो जाती है।

ऐसे में इस लिमिट से कारोबारियों के लिए डॉक्युमेंटेशन का काम बढ़ जाएगा। इसके अलावा ई-वे बिल में सरकार ट्रांसपोर्ट के दिनों की संख्या बढ़ानी चाहिए। खंडेलवाल ने कहा कि ट्रेडर्स एसोसिएशन इन मुद्दों पर जल्द सरकार से मिलेगी।