बजरी संकट : 1 हजार करोड़ की महात्वाकांक्षी निर्माण योजनाओं पर ब्रेक

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कोटा।  कोटा कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने बनास नदी की बजरी लीज पर प्रतिबंध से निर्माण कार्यों के प्रभावित होने पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से निर्माण कार्यों से जुड़े संवेदकों को राहत देने की मांग की है। सरकार द्वारा त्वरित निर्णय नहीं लेने से कोटा संभाग में एक हजार करोड़ के विकास कार्यों प्रभावित हो रहे हैं।

एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील गर्ग ने पत्रकार वार्ता में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने नवम्बर माह में बिना पर्यावरण विभाग की स्वीकृति के 5 हेक्टेयर से बड़ी लीज के रेती के खनन पर पर रोक लगा दी है। जिससे निर्माण कार्यों गति थम गई है। रेती 2 से 3 गुना मंहगे दामों पर लेने की मजबूरी है।

गर्ग ने बताया कि प्रदेश में सभी रेती खनन की लीजें 5 हेक्टेयर से ज्यादा की है। राज्य सरकार पर्यावरण विभाग से स्वीकृति की कार्रवाई करावे या नीतिगत निर्णय ले कर लीज 5 हेक्टेयर से छोटी बना कर उनका आवंटन कराए। जिससे बजरी का खनन चालू हो सके एवं निर्माण कार्यों को जारी रखा जा सके।

अध्यक्ष गर्ग ने बताया कि रेती के अभाव में सार्वजनिक निर्माण विभाग को पत्थर से रेत बनाने के संयंत्र लगाने की अनुमति देनी चाहिए, जिससे रेत के अभाव में बजरी का विकल्प मौजूद रहे।

उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा माह नवम्बर 17 में 5 हेक्टेयर से बड़ी लीज पर तब तक रोक लगाने के आदेश दिए हैं, जब तक वो लीज होल्डर्स पर्यावरण मंत्रालय व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से स्वीकृति नहीं लेते।

उन्होंने मांग की है कि जब तक रेती खनन सुचारू रूप से चालू नहीं होता तब तक चालू कार्यों में समयावृद्धि दी जावे।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण स्वीकृति के अभाव में हर बार रेती के खनन पर खतरा मण्डराता रहता है। इसके बारे में स्पष्ट नीति बनाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सरकार की स्पष्ट नीति के अभाव में हर बार प्रतिबंध का सामना करना पड़ता है और बड़ी लीज जिनकी संख्या लगभग 55 है, वे मंहगी दरों पर रेती का धंधा करते है। यदि 5 हेक्टेयर से कम की लीज आवंटित की जाए तो लगभग 200 समूहों को रोजगार मिलेगा।

सरकार चाहे तो मध्य प्रदेश की बजरी खनन नीति को भी लागू कर सकती है। पंचायतों को रेत के खनन का अधिकार दिया जा सकता है। इसके अभाव में कई महत्वाकांक्षी योजनाओं पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही सरकार ने रेत की नीतियों के बारे में सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो टेडरों का बहिष्कार किया जाएगा।

उन्होंने खेद प्रकट किया कि सत्ता पक्ष के लोग चुप है और विपक्ष भी कहां। अपनी भूमिका निभा रहा है। पत्रकार वार्ता में एसासिएशन के महामंत्री रमेश शर्मा, उपाध्यक्ष सुरेश गुप्ता, महेंद्र शर्मा, कोषाध्यक्ष हरीश गर्ग, सचिव ओम प्रकाश मालवीय तथा अशोक शर्मा व अरूण जैन बंटी आदि पदाधिकारी मौजूद थे।