अडानी, अंबानी का कर्जा माफ हो सकता है, तो किसानों का क्यों नहीं

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कोटा।   उद्योगपतियों का पैसा माफ करने से सरकार देश विकास और किसानों का कर्जा माफ को देश को कंगाल होना मानती है। यह दोहरी नीति नहीं चलेगी। केंद्र ने बड़ी कंपनियों का 8 लाख करोड़ माफ कर दिए। अडानी, अंबानी, टाटा बिरला के 3 लाख करोड़ रुपया माफ कर दिया।  बैंक कंगाल नहीं हो जाएगा

अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम ने मीडिया से कहा संपूर्ण कर्जा माफी उपज का डेढ़ गुना लाभकारी मूल्य पीएम नरेंद्र मोदी का चुनावी वादा था। जो उन्होंने 300 सभाओं में किया था। किसान आत्महत्या नहीं करेंगे। लेकिन केंद्र सरकार ने किसानों के साथ दोहरी नीति अपनाई। अपना वादा भूल गई। वित्त मंत्री अरुण जेटली कहते है कर्जा माफी राज्य सरकारें करें।

सरकार और अखिल भारतीय किसान सभा के बीच तीन महीने पहले समझौता हुआ था। 50 हजार तक का किसानों का कर्ज माफ होगा, 60 साल की उम्र वाले किसान और खेत मजदूर को पेंशन दी जाएगी। क्योंकि विधायक को उम्रभर पेंशन मिल सकती है तो देश के अन्नदाता को क्यों पेंशन नहीं।

जिस पर सरकार ने सहमति जताई थी। लेकिन कमेटी बनाकर एक माह में रिपोर्ट देने वाला वादा राज्य सरकार तीन माह बाद भी पूरा नहीं कर पाई है। ऐसे में प्रदेश का किसान सरकार से नाराज है। वह आंदोलित है।  सरकार को समझौते के वादा खिलाफी का किसान सबक सिखाएंगे।

फरवरी माह में बजट सत्र के दौरान जयपुर कूच करते हुए विधानसभा का घेराव किया जाएगा। सोमवार को यह बात कोटा प्रवास पर आए किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम ने पत्रकारों से कही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने वादा खिलाफी किसानों के साथ ही नहीं हर वर्ग के साथ की है।

अमराराम ने कहा सरकार संघर्ष की भाषा समझती है। 13 दिन के ऐतिहासिक संघर्ष के बाद सरकार को किसानों ने मजबूर किया था। एक हाई पावर कमेटी बनाकर कर्जा माफी लागू की जाए। यूपी की तरह किसानों के साथ मजाक नहीं हो। चार मंत्रियों की कमेटी बनाकर एक माह में रिपोर्ट देने की बात हुई थी। समझौते पर मंत्रियों के हस्ताक्षर है। 

तीन माह में कुछ नहीं हुआ। सीएम को किसानों के लिए वक्त नहीं। प्रदेश की 9893 ग्राम पंचायतों में दो माह में मूवमेंट छेड़ा जाएगा। गांवों में किसान संसद होगी। फरवरी में बजट सत्र होगा। चारों ओर से राजस्थान का किसान जयपुर कूच करेगा। शहीद किसानों के नाम से चार पैदल जत्थे पर जयपुर पहुंचेंगे।