स्मार्ट सिटी में मगरमच्छों का मरना घातक प्रदूषण का संकेत

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कोटा। स्मार्ट सिटी की कवायद कर रहे कोटा शहर में चम्बल की डाउन स्ट्रीम में मगरमच्छों का प्रदूषण के कारण मरना  गंभीर संकेत है, कि चम्बल की डाउन स्ट्रीम में प्रदूषण का स्तर काफी खतरनाक हो चुका है। अप स्ट्रीम में भी गंदे नालों ने चम्बल की दशा बिगाड़ रखी है।

जल बिरादरी के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश विजयवर्गीय एवं महासचिव तपेश्वर सिंह,  शेर संस्था के समन्वयक डॉ. कृष्णेंद्र सिंह ने कहा कि स्मार्ट शहर में नदी भी स्मार्ट होनी चाहिए। चम्बल नदी में जलीय जुतुओं की मौत होना नई बात नहीं है। ऑक्सीजन की कमी से नदी में हजारों मछलियां प्रतिदिन मरी हुई देखी जा सकतीं है।

2015 में भी नयापुरा में छोटी पुलिया के निकट एम मगर मच्छ मृत पाया गया था। चम्बल में प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो गया है। मगर मच्छ ऐसा प्राणी है, जिसकी प्रतिरोधक क्षमता काफी विपरीत हालातों में भी बचने की है। डायनासोर के बाद पृथ्वी पर यही जीव परिस्थितिकी को सहन कर सकता है।

दुर्भाग्य से चम्बल इतनी अधिक प्रदूषित हो गई कि इस प्राणी को भी मरना पड़ रहा है। सोमवार को मृत मगरमच्छ के पोस्टमार्टम के दौरान वहां मौजूद वन्यजीव विशेषज्ञों में शोधार्थी हरि मीणा ने भी दम घुटने से मौत होने को कारण माना है। जिनसे पुष्टि होती है कि प्रदूषण ही मूल कारण है।

विजयवर्गीय ने कहा कि मुख्यमंत्री को चम्बल प्रदूषण की गंभीरता को समझ कर रूकी हुई योजनाओं को शीघ्र लागू कराने के निर्देश स्थानीय प्रशासन को देना चाहिए। इस बारे में मुख्यमंत्री को शीघ्र ही ज्ञापन भेजा जाएगा।