राजकोषीय घाटा बेकाबू , 112 फीसदी पर पहुंचा

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नई दिल्ली। वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों यानी अप्रैल से नवंबर के बीच केंद्र का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 112 फीसदी पर पहुंच चुका है। यह वर्ष 2008-09 के बाद सर्वाधिक है जब दुनिया को आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ा था।

सरकार के इस साल बाजार से अतिरिक्त उधारी उठाने के फैसले से राजकोषीय घाटे को इस वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.2 फीसदी पर रखने के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल लग रहा है।  वर्ष 2008-09 में अप्रैल-नवंबर के दौरान राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 132.4 फीसदी पहुंच गया था।

इसके बाद से राजकोषीय घाटा पहले 8 महीने के दौरान कभी भी 100 फीसदी के पार नहीं पहुंचा। लेकिन यह स्थिति अब बदल चुकी है। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों के लिए व्यय और राजस्व के बीच अंतर यानी राजकोषीय घाटा 6.12 लाख करोड़ रुपये हो चुका चुका है।

 
बजट में पूरे वित्त वर्ष के लिए 5.46 लाख करोड़ रुपये राजकोषीय घाटे का अनुमान जताया गया था। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में कमी और अधिक व्यय के कारण राजकोषीय घाटा बढ़ा है। पिछले वर्ष इस अवधि के दौरान राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का करीब 86 फीसदी था।

इस वर्ष अप्रैल-नवंबर के दौरान राजस्व घाटा पूरे वर्ष के लक्ष्य का 152 फीसदी पहुंच गया है जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में यह 98 फीसदी था। इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘अगर नवंबर तक के राजकोषीय घाटे, नवंबर के निराशाजनक जीएसटी संग्रह और सरकार की अतिरिक्त उधारी जुटाने की घोषणा को साथ मिलाकर देखें तो यह इस वित्त वर्ष राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूकने का संकेत है।’
 
इसी सप्ताह सरकार ने बाजार से 50 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी जुटाने की घोषणा की थी जो 5.80 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से अलग होगी। साथ ही सरकार ने ट्रेजरी बिलों के जरिये अपनी उधारी में 61,203 करोड़ रुपये की कमी की थी। इससे राजकोषीय घाटे की गणना करना थोड़ा टेढ़ा काम हो गया है।

सरल गणना के हिसाब से देखें तो अतिरिक्त उधारी से इस वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.54 फीसदी पहुंच जाएगा। पिछले वित्त वर्ष में भी यह इतना ही था। दोनों बार बजट में इसे जीडीपी का 3.2 फीसदी रखने का लक्ष्य रखा गया था। अगर ट्रेजरी बिल को एक साल से ज्यादा अवधि का किया जाता है तो इससे राजकोषीय घाटा और बढ़ सकता है।
 
इस बीच नवंबर में जीएसटी संग्रह गिरकर करीब 80 हजार करोड़ रुपये रह गया। अक्टूबर में यह 83,346 करोड़ रुपये था। सरकार ने हर महीने औसतन 91 हजार करोड़ रुपये जीएसटी संग्रह का लक्ष्य रखा है। आंकड़ों के मुताबिक पहले 8 महीनों के दौरान सरकार को 8.04 लाख करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्तियां हासिल हुई जो 15.15 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान का करीब 53.1 फीसदी है।

नवंबर अंत तक कुल व्यय 14.78 लाख करोड़ रुपये है जो बजट अनुमान का 68.9 फीसदी है। पिछले वर्ष इस दौरान यह बजट अनुमान का 65 फीसदी था। अदिति ने कहा कि इस वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा कितना रहता है, यह कई कारकों पर निर्भर करेगा। यह भी देखना होगा कि जनवरी से मार्च के दौरान जीएसटी संग्रह में तेजी आती है या नहीं।