मेक इन इंडिया के मोर्चे पर मोदी सरकार को बड़ी कामयाबी

0
22

नई दिल्ली । मेक इन इंडिया के मोर्चे पर सरकार के लिए बड़ी राहत की खबर है। वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान देश में इलेक्ट्रॉनिक्स प्रॉडक्ट्स का उत्पादन पहली बार आयात से आगे निकल गया। तेल के बाद देश का सबसे अधिक विदेशी मुद्रा भंडार इलेक्ट्रॉनिक्स प्रॉडक्ट्स के आयात पर खर्च किया जाता है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 2016-17 में इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन 49.5 अरब डॉलर का हुआ, जोकि आयात पर खर्च 43 अरब डॉलर से अधिक है। सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। खासतौर पर स्मार्टफोन, अप्लायंसेज, सेट-टॉप बॉक्स और टेलिविजन आदि के उत्पादन पर जोर दिया गया है।

इस क्षेत्र में आयात का बड़ा हिस्सा पड़ोसी देश चीन से आता है और भारत वित्तीय प्रोत्साहन और दूसरे कदमों से इसका मुकाबला करना चाहता है। हाल ही में कई प्रॉडक्ट्स के आयात पर शुल्क बढ़ाया गया है। मोबाइल फोन, सेट-टॉप बॉक्स, माइक्रोवेव ओवन्स और एलईडी लैंप्स जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क में वृद्धि की गई है।

कई यूनिट्स को मोडिफाइड स्पेशल इंसेंटिव पैकेज स्कीम (M-SIPS) और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC) प्रोग्राम का फायदा मिला है। पिछले तीन वित्त वर्षों से स्थानीय उत्पादन में वृद्धि दर्ज की जा रही है, जबकि आयात में कमी हो रही है। 2015-16 में स्थानीय उत्पादन 37.4 अरब डॉलर था, जबकि आयात 41 अरब डॉलर का हुआ।

2014-15 में 30 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का उत्पादन देश में हुआ और 37.5 अरब मूल्या का आयात विदेशों से हुआ था। सरकार डिजिटल कार्यक्रम में तेजी लाने पर जोर दे रही है और 2022 तक डिजिटल इकॉनमी का टर्नओवर 1 ट्रिल्यन डॉलर करने का लक्ष्य है।

इस टारगेट को पूरा करने में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बड़े हिस्सेदार के रूप में देखा जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के टॉप CEOs से दो बार बैठक कर चुके हैं। प्रसाद ने कहा, ‘मोदी सरकार द्वारा उठाए गए नीतिगत कदमों से देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में तेजी आई है।

हमें पूरा विश्वास है कि आने वाले सालों में यह गति बरकरार रहेगी। मेक इन इंडिया के तहत हम नाम केवल घरेलू आवश्यकता की पूर्ति करना चाहते हैं, बल्कि वैश्विक बाजार में निर्यात भी करना चाहते हैं।’