डिफॉल्‍टर्स को नहीं मिलेगी कंपनी की कमान, लोकसभा में बिल पेश

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नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने इनसॉल्‍वेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड में संशोधन के लिए एक बिल लोकसभा में पेश किया है। यह बिल कोड की खामियों को दूर करने के साथ विलफुल डिफॉल्‍टर्स को कंपनी की कमान देने पर रोक लगाता है। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने इनसॉल्‍वेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड (अमेंडमेंट) बिल, 2017 लोकसभा में पेश किया। 

 खराब कर्ज के लिए कौन लगा सकती है बोली 
 बिल में प्रस्‍तावित बदलाव से खराब कर्ज के लिए खरीदार सेलेक्‍ट करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए मौजूदा समय में कोड में इस बात का स्‍पष्‍ट उल्‍लेख नहीं है कि किस तरह के खरीदार ऐसी कंपनियों के खराब कर्ज के लिए बोली लगा सकते हैं जो बैंकरप्‍सी प्रोसीडिंग के तहत आती हैं। 
 
 रिजॉल्‍यूशन प्रॉसेस में कौन नहीं हो सकता है शामिल 
 बिल में इस बात को स्‍पष्‍ट किया गया है कि रिजॉल्‍यूशन प्रोफेशनल द्वारा दिए गए निमंत्रण के जवाब में कौन सा व्‍यक्ति रिजॉल्‍यूशन प्‍लान जमा करा सकता है। इसके तहत विलफुल डिफॉल्‍टर्स, अयोग्‍य डायरेक्‍टर्स, प्रमोटर्स या डिफॉल्टिंग कंपनी का मैनेजमेंट या कोई व्‍यक्ति जो विदेश में ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा हो, रिजॉल्‍यूशन प्‍लान जमा नहीं करा सकता है। यानी ये लोग खराब कर्ज वाली कंपनी की कमान अपने हाथ में लेने के लिए आवेदन नहीं कर सकते। 
 
 पिछले साल दिसंबर में लागू हुआ था बैंकरप्‍सी कोड 
 बैकरप्‍सी कोड पिछले साल दिसंबर में लागू किया गया था। इसके तहत कर्ज दबाए बैठी कंपनियों से समयसीमा में कर्ज की वसूली की जा सकती है। इस कोड को कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्‍ट्री ने लागू किया है।
 
300 से ज्‍यादा केस शुरू हुए
इस वक्‍त तक 300 से ज्‍यादा केस इस कोड के तहत दर्ज हो चुके हैं। इनको नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल (एनसीएलटी) इस कोड के तहत मंजूरी दे चुका है। इसकी मंजूरी के बाद ही इस कोड के तहत मामला चलाया जाता है।